राहुल गांधी की कुमाऊं रैली 2027 के चुनाव की दिशा तय करेगी, उत्तराखंड को बचाने के लिए एकजुटता जरूरी: यशपाल आर्य
गरुड़ (बागेश्वर)।
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर प्रदेश में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के आगामी कुमाऊं दौरे को ऐतिहासिक बनाने के लिए पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसी सिलसिले में गरुड़ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने हुंकार भरी और आगामी चुनाव को राज्य के अस्तित्व की लड़ाई करार दिया।
कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा, “गरुड़ और बागेश्वर की यह धरती स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की भूमि है। यहां के लोग हमेशा से जागरूक रहे हैं और इस बार राहुल जी को सुनने के लिए भारी संख्या में अल्मोड़ा पहुंचेंगे।” उन्होंने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि देश को विकास के पथ पर आगे ले जाने में कांग्रेस का स्वर्णिम योगदान रहा है। राज्य आंदोलन में भी हर वर्ग का संघर्ष शामिल था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण में भाजपा की भूमिका क्या और कितनी रही, यह बात किसी से छुपी नहीं है। आज देश किस दिशा में जा रहा है और कौन लोग सत्ता पर काबिज हैं, यह पूरा देश देख रहा है।

“कांग्रेस सबको साथ लेकर चलने वाली विचारधारा है। आज भाजपा दिन-रात सिर्फ गांधी परिवार को कोसने और गाली देने का काम कर रही है, लेकिन वे कांग्रेस के संघर्षमय इतिहास को नहीं मिटा सकते।”
यशपाल आर्य ने कार्यकर्ताओं को आगाह करते हुए कहा कि आज सवाल उत्तराखंड के भविष्य को बचाने का है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “यदि हम 2027 में एकजुट होकर नहीं जीते, तो उत्तराखंड की स्थिति बद से बदतर हो जाएगी। हमारी जीत का एकमात्र मंत्र एकजुटता है। राहुल गांधी आज पूरे देश की आवाज बन चुके हैं और कुमाऊं की यह अल्मोड़ा रैली 2027 के विधानसभा चुनाव की दशा और दिशा तय करेगी।”
सत्ताधारी दल पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा अपनी रैलियों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और महिला समूहों को जबरन सरकारी तंत्र के जरिए बुलाती है। इसके विपरीत, कांग्रेस का आधार आम जनता है और कांग्रेस जन-जन को जोड़ने का काम कर रही है। इसलिए 2027 का चुनाव हमारे लिए ‘करो या मरो’ का चुनाव है।
उत्तराखंड के बुनियादी मुद्दों को रेखांकित करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने सरकार की नीतियों पर जमकर प्रहार किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पर्यटन और संस्कृति को लेकर सरकार के पास कोई विजन नहीं है। उन्होंने कुछ ज्वलंत उदाहरण सामने रखे:
पिंडारी ग्लेशियर ट्रैक: इस सुप्रसिद्ध ट्रेकिंग रूट की स्थिति आज बेहद बदहाल है।
सड़कों की दुर्दशा: कपकोट क्षेत्र सहित पहाड़ की मुख्य सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं।
धार्मिक स्थलों में अव्यवस्था: राज्य के बड़े मंदिरों में बुनियादी सुविधाओं और प्रबंधन का घोर अभाव है।
उन्होंने कहा कि इन असुविधाओं के कारण पर्यटक अब उत्तराखंड आने से कतराने लगे हैं। राज्य को आज एक ठोस और सुव्यवस्थित पर्यटन नीति की सख्त जरूरत है।
रामनगर (मोहान) स्थित ‘इंडियन मेडिसिन फार्मास्युटिकल्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ (IMPCL) के निजीकरण के मुद्दे पर आर्य ने सरकार को पूरी तरह नाकाम बताया। उन्होंने सवाल उठाया, “एक तरफ पहाड़ का युवा रोजगार के लिए तरस रहा है, वहीं दूसरी तरफ मुनाफे में चल रही सरकारी दवा कंपनी को निजी हाथों में बेचने का क्या औचित्य है?”
उन्होंने एलान किया कि राहुल गांधी के दौरे के तुरंत बाद कांग्रेस इस निजीकरण के खिलाफ रामनगर में एक बड़ा और व्यापक जनांदोलन शुरू करेगी।
क्या यशपाल आर्य होंगे उत्तराखंड के अगले सीएम?
प्रेस वार्ता और जनसभा के अंत में जब नेता प्रतिपक्ष से यह तीखा सवाल पूछा गया कि “क्या 2027 में कांग्रेस की सरकार बनने पर यशपाल आर्य उत्तराखंड के अगले मुख्यमंत्री होंगे?” तो उन्होंने इस सवाल को एक सधी हुई मुस्कान के साथ टाल दिया। उन्होंने बेहद परिपक्वता से जवाब देते हुए बस इतना कहा, “यह फैसला मेरा नहीं है, यह तो पार्टी का शीर्ष नेतृत्व तय करेगा। हमारा लक्ष्य अभी सिर्फ कांग्रेस को मजबूत करना है।”
उन्होंने पूर्ण विश्वास जताया कि 2027 का चुनाव कार्यकर्ताओं के लिए सकारात्मक संदेश और कांग्रेस के लिए ‘अच्छे दिन’ लेकर आएगा।
रिपोर्ट: विपिन जोशी


















