उत्तराखंड पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, ‘मित्र पुलिस’ के दावों के बीच आक्रोश

देहरादून: उत्तराखंड में हाल के दिनों में पुलिस के कथित दुर्व्यवहार और उत्पीड़न से जुड़ी कई घटनाओं ने राज्य की कानून-व्यवस्था और ‘मित्र पुलिस’ की छवि पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। भाकपा (माले) के राज्य सचिव इन्द्रेश मैखुरी समेत विभिन्न सामाजिक संगठनों ने पुलिस महानिरीक्षक (कानून-व्यवस्था) को पत्र लिखकर पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञापनकर्ता इंद्रेश मैखुरी ने कहा की बीते दिनों राज्य में कुछ दुखद घटनाएं घटी हैं , प्रदेश में कानून व्यवस्था चरमरा गई है उन्होंने निम्नलिखित मामलों का हवाला देते हुए बताया कि मुख्य घटनाएं हैं जिन्होंने हिलाया प्रदेश:
सतपुली (पौड़ी गढ़वाल): 20 वर्षीय युवक पंकज कुमार ने पुलिस पिटाई और अपमान से क्षुब्ध होकर आत्महत्या की। वीडियो साक्ष्य में पुलिस पर बेरहमी से पीटने और परिजनों के साथ बदसलूकी के आरोप लगे हैं।
खैरना (नैनीताल): बालम सिंह बिष्ट नामक युवक ने पुलिस उत्पीड़न के कारण जहर खाकर जान दी। आरोप है कि पुलिस ने मोबाइल छीना, पैसे लूटे और साक्ष्य मिटाने के लिए मारपीट की। परिजनों को डराने-धमकाने की भी खबर है।
लम्बगांव (टिहरी): रुबीना नामक युवती का घर धर्म के आधार पर जलाए जाने का आरोप। वीडियो साक्ष्य होने के बावजूद पुलिस पर कार्रवाई न करने और लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप हैं।
प्रेमनगर (देहरादून): उत्तरांचल यूनिवर्सिटी के छात्रों पर हुए बर्बर लाठीचार्ज को लेकर भी पुलिस की कार्यशैली की आलोचना की गई है।
पुलिस महानिरीक्षक को ज्ञापन सौपते हुए प्रतिनिधिमंडल ने प्रमुख मांगें उठाई ।
1. सतपुली प्रकरण: तत्कालीन थानाध्यक्ष और पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित किया जाए और उन पर ‘आत्महत्या के लिए उकसाने’ व ‘SC/ST एक्ट’ के तहत मुकदमा दर्ज हो।
2. खैरना मामला: आरोपी पुलिसकर्मियों को नामजद कर कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए।
3. लम्बगांव मामला: दोषियों की गिरफ्तारी हो और ढिलाई बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर गाज गिरे।
संगठनों का कहना है: “उत्तराखंड पुलिस अपनी संवेदनशीलता और संयम खोती जा रही है। आम जनता के साथ अपराधी जैसा व्यवहार करना ‘मित्र पुलिस’ के ध्येय वाक्य का अपमान है।”
ज्ञापन दल में शामिल रहे : इन्द्रेश मैखुरी (भाकपा माले), त्रिलोचन भट्ट (उत्तराखंड इंसानियत मंच), समर भंडारी, भुवन पाठक (भारत जोड़ो अभियान), डॉ. राघवेंद्र और अन्य सामाजिक कार्यकर्ता।
रिपोर्ट संपादन – विपिन जोशी, स्वर स्वतंत्र


















