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गोल ज्यू संदेश यात्रा का शुभारंभ

उत्तराखंड की देवभूमि में आस्था और संस्कृति का संगम एक बार फिर श्री गोल ज्यू संदेश यात्रा 2026 के रूप में दिखाई दे रहा है। यह यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि कुमाऊं और गढ़वाल के सांस्कृतिक भूगोल को जोड़ने वाला एक जीवंत सेतु है।
न्यायए के देवता की संदेश यात्रा: आस्था और सांस्कृतिक एकता का महापर्व
गरुड़ (अपनी धरोहर न्यास के तत्वावधान में आयोजित तृतीय ‘श्री गोल ज्यू संदेश यात्रा’ का विधिवत पोस्टर विमोचन प्राचीन गोलू मंदिर, गरुड़ में संपन्न हुआ। चम्पावत से शुरू हुई यह दस दिवसीय यात्रा उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों से गुजरते हुए आगामी 29 अप्रैल 2026 को गरुड़ पहुंचेगी।
क्यों खास है गोल ज्यू संदेश यात्रा ?
गोलू ज्यू को उत्तराखंड में न्याय का देवता और लोक देवता ‘के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि जब कहीं से न्याय नहीं मिलता, तो भक्त गोलू ज्यू के मंदिर में अपनी अर्जी (लिखित पत्र) लगाते हैं। इस संदेश यात्रा का उद्देश्य इसी अटूट विश्वास को पुनर्जीवित करना और राज्य की युवा पीढ़ी को अपनी लोक विरासत से जोड़ना है।
यात्रा का मार्ग: चम्पावत से बद्रीनाथ तक
यात्रा का मार्ग इस प्रकार तैयार किया गया है कि यह कुमाऊं और गढ़वाल दोनों मंडलों के प्रमुख तीर्थों को स्पर्श करे:
उद्गम: यात्रा का प्रारंभ चम्पावत से हुआ है, जिसे गोलू ज्यू का मूल स्थान माना जाता है।
प्रमुख पड़ाव: हरिद्वार के पावन तटों से होते हुए यह यात्रा श्रीनगर (गढ़वाल), भगवान बद्रीविशाल की पवित्र भूमि कर्णप्रयाग और फिर कुमाऊं के गंगोलीहाट, थल, धारचूला और घोड़ाखाल जैसे सिद्ध स्थलों तक जाएगी।
गरुड़ आगमन: 29 अप्रैल को ग्वालदम के रास्ते यात्रा गरुड़ पहुंचेगी, जहाँ विगत वर्षों की भाँति यात्रा के भव्य स्वागत की व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
गोलू ज्यू: सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक तथ्य
इस यात्रा के महत्व को समझने के लिए गोलू ज्यू से जुड़े इन तथ्यों को जानना आवश्यक है:
1. न्याय के प्रतीक: गोलू ज्यू को भगवान शिव और कृष्ण का अवतार माना जाता है। उन्हें “इष्ट देव” के रूप में पूजा जाता है जो सफेद घोड़े पर सवार होकर भक्तों के कष्ट हरने आते हैं।
2. सांस्कृतिक सेतु: यद्यपि गोलू ज्यू का मूल स्थान चम्पावत और चितई (अल्मोड़ा) माना जाता है, लेकिन गढ़वाल के श्रीनगर और चमोली क्षेत्रों में भी उनकी उतनी ही मान्यता है। यह यात्रा इसी साझा संस्कृति को मजबूती देती है।
3. लिखित अर्जी की परंपरा: विश्व प्रसिद्ध ‘घोड़ाखाल’ और ‘चितई’ मंदिरों की तरह ही गरुड़ का प्राचीन मंदिर भी भक्तों की आस्था का केंद्र है, जहाँ आज भी लोग अपनी समस्याओं के समाधान के लिए घंटियाँ और पत्र चढ़ाते हैं
तैयारियों पर विमर्श और पोस्टर विमोचन

गोल ज्यू संदेश यात्रा विवरण

अपनी धरोहर संस्था द्वारा आयोजित श्री गोल ज्यू संदेश यात्रा का तृतीय संस्करण आज 19 अप्रैल से आगामी 09 मई तक समूचे उत्तराखंड स्तर पर आयोजित हो रहा है। यात्रा का प्रारंभ चंपावत के श्री गोल ज्यू मंदिर से प्रारम्भ हो चुका है। तदंतर यह यात्रा कुमाऊं एवं गढ़वाल के अंचलों में भ्रमण करेगी। यात्रा आगामी 29 अप्रैल को ग्वालदम होते हुए प्रातः साढ़े नौ बजे गरुड़ में प्रवेश करेगी और यहां श्री गर्भ गोल ज्यू मंदिर में यात्रा रथ का कत्यूर घाटी की ओर से भव्य स्वागत किया जाएगा जिसकी तैयारी बैठक आज आयोजन स्थल पर संपन्न हुई बैठक में नंदन सिंह अल्मिया,हरीश जोशी, कैलाश चंद्र जोशी,बिपिन जोशी, चंद्रशेखर बड़सीला,सुन्दर बरोलिया गुड्डू भंडारी, राधेश्याम,आदि उपस्थित रहे। गरुड़ से आगे बागेश्वर होते हुए यात्रा आगे के पड़ावों हेतु कांडा भद्रकाली को प्रस्थान करेगी।
गोल ज्यू केवल एक क्षेत्र के नहीं, बल्कि सम्पूर्ण हिमालयी लोक संस्कृति के रक्षक हैं। यह यात्रा चम्पावत से धारचूला तक की दूरियों को भक्ति के माध्यम से मिटाने का प्रयास है।”
इस भव्य आयोजन का समापन कुमाऊं के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों जैसे देवीधुरा और घोड़ाखाल के दर्शनों के साथ होगा, जो राज्य में पर्यटन और धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।

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