कैंची धाम में बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़, यातायात जाम की समस्या और व्यावहारिक समाधानों पर आधारित एक प्रभावशील एवं विचारोत्तेजक लेख
आस्था का सम्मान और जनजीवन की सुगमता: कैंची धाम में ट्रैफिक जाम का स्थायी समाधान आवश्यक
उत्तराखंड की शांत और अलौकिक वादियों में स्थित नीब करौरी बाबा का ‘कैंची धाम’ आज देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। बाबा के दर्शन और आशीर्वाद की लालसा में हर दिन हजारों भक्त यहाँ पहुँचते हैं। आस्था अपनी जगह अत्यंत पवित्र और सर्वोपरि है, लेकिन इसके कारण उत्पन्न हो रही यातायात की भीषण समस्या से स्थानीय जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। रोज़मर्रा के कामों के लिए निकलने वाले निवासियों, स्कूली बच्चों और एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को घंटों जाम में फँसना पड़ता है।
आस्था और जनजीवन के बीच संतुलन बनाना समय की माँग है, और इसका समाधान मंदिर ट्रस्ट तथा स्थानीय प्रशासन के परस्पर बेहतर तालमेल से ही संभव है।
समस्या की गंभीरता और समाधान के कुछ महत्वपूर्ण सुझाव:
1. धारण क्षमता (Carrying Capacity) का आकलन
कैंची धाम की भौगोलिक स्थिति सीमित है। अतः सबसे पहला कदम यह होना चाहिए कि मंदिर ट्रस्ट और प्रशासन मिलकर कैंची की वास्तविक धारण क्षमता के अनुरूप प्रतिदिन दर्शनार्थियों की एक अधिकतम संख्या निर्धारित करे।
2. ऑनलाइन व ऑफलाइन पूर्व बुकिंग तथा टाइम स्लॉट व्यवस्था
निर्धारित संख्या के आधार पर (+/- 10% का लचीलापन रखते हुए) दर्शनार्थियों के लिए पूर्व बुकिंग प्रणाली (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन) लागू की जाए। श्रद्धालुओं को निश्चित ‘टाइम स्लॉट’ के हिसाब से ही प्रवेश पास जारी किए जाएँ, जिससे एक ही समय पर अत्यधिक भीड़ एकत्रित न हो।
3. भवाली में पार्किंग और शटल सेवा का निर्माण
मैदान (मैदानी क्षेत्रों) की ओर से आने वाले वाहनों का दबाव सबसे अधिक रहता है। इसके लिए कालाढूंगी और काठगोदाम मार्गों पर बैरियर लगाए जाएँ।
* सरकारी पहल: सरकार को चाहिए कि भवाली में कैंची रोड पेट्रोल पंप से ऊपर जंगल की ओर लिंक रोड के पास कम से कम एक हजार वाहनों की क्षमता वाला एक बड़ा पार्किंग स्थल बनाए।
* यहाँ से कैंची धाम तक केवल नियमित और सुव्यवस्थित दोतरफा शटल सेवा (बस/ई-रिक्शा) का संचालन किया जाए।
4. रातीघाट क्षेत्र में वैकल्पिक व्यवस्था
यद्यपि पहाड़ की ओर से दर्शनार्थियों का दबाव 15 जून के मुख्य मेले के अलावा सामान्य दिनों में कम रहता है, फिर भी पूर्व-तैयारी के तहत रातीघाट में नदी की ओर मैदान विकसित कर पार्किंग और शटल की व्यवस्था की जानी चाहिए।
5. सप्ताहांत (Weekends) और लंबी छुट्टियों पर विशेष रणनीति
शनिवार, रविवार और त्योहारों/छुट्टियों के दौरान पर्यटकों व श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। इन दिनों के लिए यातायात डायवर्जन और पार्किंग नियमों का पालन प्राथमिकता के आधार पर हो।
6. ‘वीआईपी कल्चर’ का अंत और प्रशासनिक सख्ती
जब तक नियम सभी के लिए समान नहीं होंगे, व्यवस्था सुधारना असंभव है। प्रशासन और पुलिस को यातायात नियमों का कड़ाई से पालन कराना होगा। ‘वीआईपी कल्चर’ को पूरी तरह खत्म कर सामान्य श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए सुगम व्यवस्था बनानी होगी।
कैंची धाम की पवित्रता, महत्ता और श्रद्धालुओं की श्रद्धा अक्षुण्ण रहनी चाहिए, लेकिन यह स्थानीय निवासियों की दिनचर्या की कीमत पर नहीं होना चाहिए। यदि मंदिर ट्रस्ट की नीतियां और प्रशासन का प्रबंधन एक साथ मिलकर काम करें, तो कैंची धाम आस्था का ऐसा केंद्र बना रहेगा जहाँ भक्ति भी होगी और व्यवस्था भी। सरकार को तुरंत इन व्यावहारिक सुझावों पर संज्ञान लेकर ठोस धरातलीय कदम उठाने चाहिए।
विपिन जोशी, स्वर स्वतंत्र
















