गांधी जयंती पर पद्मश्री राधा भट्ट से संवाद: “गांधी केवल विचार नहीं, आचरण हैं”
— विपिन जोशी
गांधी जयंती के अवसर पर पद्मश्री एवं ‘पहाड़ की गांधी’ नाम से विख्यात सुप्रसिद्ध गांधीवादी विचारक राधा भट्ट (राधा बहन) से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि आज के संदर्भ में भी गांधी जी के विचारों को जीया जा सकता है। गांधी जी ने जैसा कहा, वैसा जीया भी। सिर्फ सांस्कृतिक आयोजन करके गांधी जयंती मनाने से काम नहीं चलेगा; सत्य, अहिंसा, ग्राम स्वराज, पर्यावरण चेतना और युवा पीढ़ी की नैतिक जिम्मेदारी ही समाज में वास्तविक ‘स्वराज’ लाएगी।
दीदी ने अपने संदेश में कहा, “आजादी से लेकर आज तक सभी सरकारों ने गांधी के विचारों को नकारा है, यहाँ तक कि गांधी जी के अनुयायी भी उनके विचारों को पूरी तरह जीवन में नहीं उतार पाए।”
आज 2 अक्टूबर को जब हम महात्मा गांधी जी की जयंती मना रहे हैं, तो हमें स्वयं से एक बुनियादी सवाल पूछना होगा—क्या गांधी केवल इतिहास के पन्नों में याद किए जाने वाले महापुरुष हैं, या वे आज के संकटग्रस्त विश्व के लिए एक जीवित मार्गदर्शक हैं?
मेरी दृष्टि में, आज दुनिया जिस मोड़ पर खड़ी है—जहाँ हिंसा, पर्यावरण विनाश, उपभोक्तावाद और नैतिक पतन चरम पर है—वहाँ धरती को बचाने का एकमात्र मार्ग गांधी जी का रास्ता ही है।
जल, जंगल और जमीन पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि जल, जंगल, जमीन और पर्यावरण की सुरक्षा ही असली स्वराज है। गांधी जी ने कहा था कि प्रकृति से उतना ही लो जितना आवश्यक हो; अत्यधिक दोहन प्रकृति के लिए घातक है। पहाड़ों में पहले बड़े बांध (डैम) बने और अब टनल (सुरंग) व रेल परियोजनाएं आ रही हैं, जो हिमालय को जर्जर बना देंगी। विकास का यह मौजूदा मॉडल दुनिया को कहाँ ले जाएगा?
गांधी जी ने कहा था—”प्रकृति के पास हर मनुष्य की आवश्यकता को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, लेकिन उसके लालच को पूरा करने के लिए नहीं।”
हमने पहाड़ों, नदियों और जंगलों को केवल उपभोग की वस्तु मान लिया है। बड़ी-बड़ी सुरंगें खोदकर, नदियों का गला घोंटकर और वनों को काटकर हम जिसे ‘विकास’ कह रहे हैं, वह वास्तव में विनाश का आमंत्रण है। यदि पर्यावरण नष्ट हो गया, तो मानव सभ्यता का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। सच्चा ग्राम स्वराज तभी संभव है, जब हमारे गाँव, जलस्रोत और जंगल सुरक्षित रहें।
नारी शक्ति पर राधा भट्ट ने दो टूक शब्दों में कहा, “पहाड़ों और ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएँ ही प्रकृति और जीवन की रीढ़ हैं। गांधी जी ने स्वाधीनता संग्राम में महिलाओं की भूमिका को सर्वोपरि माना था। आज भी समाज में नशाबंदी, पर्यावरण रक्षा और बुनियादी शिक्षा के क्षेत्र में बहनों को ही आगे आकर नेतृत्व संभालना होगा।”
युवाओं का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा—’डरो मत, सच के साथ खड़े होओ’ और सोच से भी युवा बनो।
“आज के युवाओं से मेरा विशेष आग्रह है कि गांधी जी अपने जीवन के अंतिम समय तक अपनी सोच और व्यवहार से युवा थे। वर्तमान समय में समाज में भय, चुप्पी और वैमनस्य का माहौल बन रहा है। अन्याय, गैर-बराबरी और प्रकृति के दोहन के खिलाफ आवाज उठाना ही गांधी जी को सच्ची श्रद्धांजलि है। युवाओं को निर्भीक होकर सत्य, अहिंसा और सामाजिक भाईचारे के मार्ग पर आगे बढ़ना होगा।”
गांधी केवल विचार नहीं, बल्कि आचरण हैं। जब तक हम अपने जीवन में सादगी, श्रम और दूसरों के प्रति करुणा नहीं अपनाएंगे, तब तक गांधी जयंती मनाना अधूरा रहेगा।
आइए, इस पावन अवसर पर हम संकल्प लें कि हम अपने विचारों और कार्यों से इस धरती को अधिक शांतिपूर्ण, सुंदर और संवेदनशील बनाएंगे।
















