कत्यूर रामलीला मंचन : अतीत से वर्तमान तक
विपिन जोशी… कत्यूर घाटी की अमर सांस्कृतिक धरोहर: 89 वर्षों का अविरल रंगमंचीय सफर कुमाऊँ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गोद में बसी कत्यूर घाटी (बैजनाथ-गरुड़) न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह अपनी समृद्ध लोक-संस्कृति और नाट्य परंपराओं के लिए भी जानी जाती है। रामलीला, होली, कोट भ्रामरी…