पिथौरागढ़ जिला अस्पताल को जौलजीबी स्थानांतरित करने की मांग तेज
विपिन जोशी. स्वर स्वतंत्र
पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय में मेडिकल कॉलेज बनने के बाद जिला अस्पताल के स्थानांतरण की प्रक्रिया शासन स्तर पर चल रही है। इस बीच, हिमालय बचाओ संघर्ष समिति ने इस अस्पताल को सीमांत क्षेत्र जौलजीबी में शिफ्ट करने की जोरदार मांग उठाई है।
मुख्य बिंदु और समिति का पक्ष:
15 तर्क किए तय: समिति के प्रदेश अध्यक्ष जगत सिंह मर्तोलिया ने बताया कि जौलजीबी में जिला अस्पताल स्थापित करने के पक्ष में 15 मजबूत तर्क तैयार किए गए हैं।
पर्याप्त भूमि की जिम्मेदारी: समिति का कहना है कि जौलजीबी या इसके आसपास के क्षेत्रों (धारचूला, कनालीछीना, डीडीहाट विकासखंड) में अस्पताल के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी समिति खुद लेगी।
विशाल आबादी को फायदा: जौलजीबी में अस्पताल बनने से धारचूला, मुनस्यारी, डीडीहाट और कनालीछीना विकासखंडों के साथ-साथ पड़ोसी देश नेपाल के मरीजों को भी सीधा लाभ मिलेगा।
भविष्य की कनेक्टिविटी: टनकपुर-जौलजीबी और बांसबगड़-बंगापानी मोटर मार्ग बनने के बाद मूनाकोट, बेरीनाग और बागेश्वर जिले के कपकोट क्षेत्र की जनता के लिए भी यह स्थान बेहद सुगम हो जाएगा।
पीएम मोदी के ‘वाइब्रेंट विलेज’ विजन से जोड़ा: समिति ने इस मांग को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सीमांत गांवों को देश का पहला गांव’ बनाने के विजन से जोड़ा है। मर्तौलिया ने कहा कि सीमावर्ती (वाइब्रेंट) इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना ही पीएम के सपने को साकार करेगा।
आगे की रणनीति:
समिति का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही देहरादून जाकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात करेगा। इसके अलावा, इस मांग को लेकर जौलजीबी में जल्द ही एक महापंचायत का आयोजन भी किया जाएगा।



















