गरुड़ में मंगलमूर्ति संगठन ने किया भव्य गणेश विसर्जन, कत्यूर घाटी में दिखी सामाजिक एकता और आस्था की झलक
उत्तराखंड की ऐतिहासिक कत्यूर घाटी स्थित गरुड़ क्षेत्र में इस वर्ष गणेश जन्मोत्सव का आयोजन धार्मिक आस्था और सामाजिक समरसता की एक अनूठी मिसाल बनकर उभरा। मंगलमूर्ति संगठन के तत्वावधान में आयोजित इस दस दिवसीय गणेश महोत्सव का समापन राम मंदिर गरुड़ से बैजनाथ मंदिर तक निकाली गई भव्य गणेश विसर्जन शोभायात्रा के साथ हुआ। शोभायात्रा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्री गणेश को भावभीनी विदाई दी।
दस दिनों तक चले इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान रोजाना भंडारे और शाम को भव्य भजन संध्या का आयोजन किया गया, जिसका क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं ने आनंद लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में मंगलमूर्ति संगठन के सदस्यों के साथ-साथ स्थानीय युवाओं, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न राजनीतिक व सामाजिक संगठनों का विशेष योगदान रहा।
सामाजिक एकता और जन-सहयोग का संदेश
आयोजन की सफलता पर विचार व्यक्त करते हुए विपिन तिवारी ने कहा कि यह अनुभव बेहद सुखद और आत्मिक शांति देने वाला रहा। गरुड़ क्षेत्र की जनता ने जिस तरह से बढ़-चढ़कर इस महोत्सव में अपना सहयोग दिया, वह सराहनीय है।
वहीं, घनश्याम जोशी ने कहा कि गणेश महोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान न होकर सामाजिक एकता और आस्था का एक बड़ा प्रतीक है। मंगलमूर्ति संगठन की यह सकारात्मक पहल अब धीरे-धीरे संपूर्ण कत्यूर क्षेत्र में फैल रही है और लोगों को एक सूत्र में पिरोने का काम कर रही है।
स्थान और परंपरा को लेकर रोचक चर्चा
विसर्जन यात्रा के दौरान क्षेत्र के प्रबुद्धवर्ग और जानकारों के बीच एक दिलचस्प चर्चा भी सुनने को मिली। कुछ लोगों का कहना था कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश का गृह स्थल तो उत्तराखंड ही है, ऐसे में उनकी ‘विदाई’ या विसर्जन की परंपरा का क्या औचित्य है? हालांकि, दूसरी ओर बहुसंख्यक समाज और श्रद्धालुओं का स्पष्ट मानना था कि गणेश महोत्सव जैसे आयोजनों का मुख्य उद्देश्य समाज में समरसता, भाईचारा और सांस्कृतिक चेतना का विस्तार करना है, जिससे क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
सम्पादक : विपिन जोशी
मीडिया/संस्थान: स्वर स्वतंत्र


















