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ग्रामीण युवाओं के हक की लड़ाई

विपिन जोशी

काफलीगैर डिग्री कॉलेज का शासनादेश जारी करने की मांग: अनिश्चितकालीन धरने के 8वें दिन उमड़ा जनाक्रोश, उत्तराखंड संघर्ष वाहिनी मैदान में
​काफलीगैर (बागेश्वर): धरने का 8वां दिन: काफलीगैर महाविद्यालय के शासनादेश की मांग पर डटे ग्रामीण।

​कवि जोशी का सवाल: घोषणा के बाद भी शासनादेश रोकने पर सरकार की मंशा पर उठाए सवाल।

​रमेश पांडे ‘कृषक’ का समर्थन: ग्रामीण युवाओं के हक की लड़ाई में संघर्ष वाहिनी के पूर्ण सहयोग का ऐलान।

​आंदोलनकारियों का रुख: जब तक शासनादेश जारी नहीं होगा, अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।

​क्षेत्र में राजकीय महाविद्यालय का शासनादेश जारी करने की मांग को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन आज 8वें दिन भी पूरी ताकत के साथ जारी रहा। ग्रामीण क्षेत्र के नौनिहालों को उनके अपने ही क्षेत्र में उच्च शिक्षा का अधिकार दिलाने की इस लड़ाई में जनसमर्थन लगातार बढ़ता जा रहा है। रविवार को आंदोलनकारी ग्रामीणों को ‘उत्तराखंड संघर्ष वाहिनी’ (बागेश्वर) सहित अनेक सामाजिक व राजनीतिक संगठनों का सीधा सहयोग और समर्थन प्राप्त हुआ।
​धरना स्थल पर पहुंचे उत्तराखंड संघर्ष वाहिनी के वरिष्ठ सदस्य कवि जोशी ने शासन-प्रशासन की नीयत पर कड़ा सवाल उठाते हुए कहा, “ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को बेहतर उच्च शिक्षा से वंचित क्यों रखा जा रहा है? जब महाविद्यालय की घोषणा की जा चुकी है, तो आखिर इसका शासनादेश जारी करने में शासन को क्या अड़चन आ रही है? यह केवल एक कॉलेज की मांग नहीं, बल्कि हमारे नौनिहालों के भविष्य और उनके शिक्षा के अधिकार का सवाल है। जब तक शासनादेश जारी नहीं होता, जनता पीछे हटने वाली नहीं है।”
​वहीं, आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए संगठन के प्रतिनिधि रमेश पांडे ‘कृषक’ ने कहा, “काफलीगैर क्षेत्र के युवाओं को दूर-दराज न जाना पड़े, इसके लिए डिग्री कॉलेज का संचालन बेहद आवश्यक है। यह क्षेत्र के विकास और दूरस्थ ग्रामीण बच्चों के हक की न्यायपूर्ण लड़ाई है। संघर्ष वाहिनी और तमाम सामाजिक संगठन इस जनहित के मुद्दे पर ग्रामीणों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं और मांग पूरी होने तक यह संघर्ष जारी रहेगा।”
​विभिन्न संगठनों से मिले इस मजबूत सहयोग पर समस्त क्षेत्रवासियों और आंदोलनकारियों ने आभार व्यक्त किया। वक्ताओं ने एक स्वर में चेतावनी दी कि यदि शासन ने जल्द ही महाविद्यालय का शासनादेश जारी नहीं किया, तो इस जनांदोलन को और अधिक व्यापक व उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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