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रक्षाबंधन का पौराणिक और शैक्षणिक संदेश

कबाड़ से बने रेशमी धागे: राजकीय जूनियर हाईस्कूल रौल्याना में बच्चों ने उकेरा रक्षाबंधन का पौराणिक और शैक्षणिक संदेश

​विशेष रिपोर्ट | रौल्याना

​भाद्रपद पूर्णिमा के आगमन से पूर्व ही राजकीय जूनियर हाईस्कूल रौल्याना का परिसर रंगों, रचनात्मकता और लोक-परंपरा की महक से सराबोर हो उठा। भाई-बहन के अटूट स्नेह और सुरक्षा के संकल्प के प्रतीक ‘राखी’ त्यौहार की पारंपरिक मान्यता को आधुनिक शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए विद्यालय में एक अनूठी राखी निर्माण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

​छात्र-छात्राओं ने वेस्ट मटेरियल (अपशिष्ट सामग्री) और रंग-बिरंगे पेपर्स का उपयोग कर अत्यंत सुंदर व नवोन्मेषी राखियां तैयार कीं। बच्चों ने यह साबित कर दिखाया कि पर्यावरण संरक्षण की भावना और भारतीय संस्कृति का समागम यदि सही मार्गदर्शन में हो, तो बेकार पड़ी वस्तुएं भी पावन रक्षासूत्र का रूप ले सकती हैं।

​कार्यक्रम के दौरान भारतीय संस्कृति में रक्षाबंधन के ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए शिक्षक दीपक पाण्डेय ने विद्यार्थियों को बताया कि राखी केवल एक रेशमी धागा नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, वचनबद्धता और सुरक्षा का अमर प्रतीक है। वहीं, शिक्षक भाष्कर पन्त ने जीवन में राखी के नैतिक और मानवीय मूल्यों पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि यह त्यौहार परस्पर विश्वास, सम्मान और एक-दूसरे के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ करता है।

​प्रतियोगिता को सुचारू एवं उत्साहपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में विद्यालय परिवार की सक्रिय सहभागिता रही। इस अवसर पर शिक्षक दीपक पाण्डेय, भाष्कर पन्त, सोनू गोस्वामी, गंगा देवी, दिव्या बोरा, प्रीति गोस्वामी के साथ-साथ छात्र-छात्राएं गौरव रावत, बबीता फर्स्वाण, राशि गोस्वामी, गुड़िया फर्स्वाण, हर्षिता और हर्षित सहित समस्त विद्यालय परिवार उपस्थित रहा। बच्चों द्वारा निर्मित ये राखियां न केवल उनकी कलात्मक सोच को दर्शाती हैं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़े रहने का एक सुंदर संदेश भी देती हैं।

विपिन जोशी

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