बमनस्वाल गाँव में विसंक्रमण एवं स्वच्छता पर प्रौद्योगिकी प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित.
रेशम उत्पादन के उभरते केंद्र के रूप में आगे बढ़ रहा बमनस्वाल, लगभग 60 परिवार रेशमकीट पालन से जुड़े
बमनस्वाल, अल्मोड़ा | 21 अगस्त 2026
केंद्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के “मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0 (MRMA 2.0) – राष्ट्रीय वृहद् रेशम प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अभियान” के अंतर्गत 21 अगस्त 2026 को जनपद अल्मोड़ा के बमनस्वाल गाँव में “रेशमकीट पालन में विसंक्रमण एवं स्वच्छता” विषय पर प्रौद्योगिकी प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में कुल 32 रेशम पालकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा केंद्रीय रेशम बोर्ड के वैज्ञानिकों एवं रेशम निदेशालय (DoS), उत्तराखंड के अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से संवाद किया।
कार्यक्रम में डॉ. पवन सैनी, वैज्ञानिक-डी एवं प्रमुख, क्षेत्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान केंद्र (RSRS), सहसपुर, देहरादून ने किसानों को वैज्ञानिक शहतूत उत्पादन एवं रेशमकीट पालन के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से शहतूत बागान के उचित रख-रखाव, पालन गृह एवं उपकरणों के प्रभावी विसंक्रमण, पालन के दौरान स्वच्छता, रेशमकीटों में मोल्ट (केंचुल बदलने की अवस्था) की सही पहचान तथा रोगों की रोकथाम हेतु बुझा हुआ चूना (Slaked Lime) एवं विजेता (Vijetha) के उचित उपयोग के बारे में विस्तार से बताया।
स्वस्थ रेशमकीट फसल एवं गुणवत्तापूर्ण कोकून उत्पादन को ध्यान में रखते हुए किसानों को पालन गृह में उचित वायु-संचार (Ventilation), विभिन्न अवस्थाओं में पर्याप्त दूरी/स्पेसिंग बनाए रखने, स्वच्छ पालन व्यवस्था, अस्वस्थ कीटों की समय पर पहचान तथा वैज्ञानिक माउंटिंग विधियों के बारे में भी तकनीकी जानकारी प्रदान की गई।
कार्यक्रम के दौरान एक विशेष वैज्ञानिक–किसान संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें किसानों ने केंद्रीय रेशम बोर्ड के वैज्ञानिकों एवं रेशम निदेशालय के कर्मचारियों के साथ अपने अनुभव एवं क्षेत्रीय समस्याएँ खुलकर साझा कीं। किसानों की समस्याओं के समाधान तथा कोकून उत्पादन में सुधार हेतु व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक सुझाव दिए गए।
श्री आशीष अंताला, निरीक्षक, रेशम निदेशालय, अल्मोड़ा, तथा सहयोगी कर्मचारी सुश्री वैशाली पांडे एवं श्री हिमांशु कांडपाल ने किसानों को वैज्ञानिक रेशमकीट पालन अपनाने के लिए प्रेरित किया तथा रेशम उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए संचालित विभिन्न विभागीय योजनाओं एवं उपलब्ध सहायता की जानकारी दी।
बमनस्वाल गाँव अल्मोड़ा जनपद में रेशम उत्पादन के एक आशाजनक केंद्र के रूप में उभर रहा है। वर्तमान में गाँव के लगभग 60 परिवार रेशमकीट पालन से जुड़े हुए हैं तथा किसानों के पास स्वयं के शहतूत बागान उपलब्ध हैं। कई किसान प्रति फसल 10 किलोग्राम से अधिक तथा लगभग 10–15 किलोग्राम हरे कोकून का उत्पादन कर रहे हैं, जो क्षेत्र में रेशमकीट पालन की उत्साहजनक सफलता को दर्शाता है।
क्षेत्र में शहतूत संसाधनों को और सुदृढ़ करने के लिए रेशम निदेशालय द्वारा किसानों के खेतों में V1 किस्म के लगभग 5,000 शहतूत पौधों का रोपण कराया गया है। इसके अतिरिक्त, कई किसानों के पास S-146 किस्म के 300 से अधिक स्थापित शहतूत पौधे भी उपलब्ध हैं, जो अच्छी स्थिति में हैं.
MRMA 2.0 के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम ने वैज्ञानिक शहतूत बागान प्रबंधन, प्रभावी विसंक्रमण एवं स्वच्छता, उन्नत रेशमकीट पालन तकनीकों तथा नियमित वैज्ञानिक–किसान संवाद के माध्यम से बमनस्वाल को एक सुदृढ़ एवं उत्पादक रेशम उत्पादन क्लस्टर के रूप में विकसित करने की संभावनाओं को और मजबूत किया।




















