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रेशम कीट पालन से मज़बूत होती आर्थिकी : बागेश्वर

भारत सरकार की महत्वपूर्ण योजना मेरा रेशम मेरा अभिमान से लाभान्वित हो रहे किसान, 22 से 16 किलो कोकून कीट पालक उगा रहे है.

देश भर के 250 जिलों में चल रही है. रेशम कीट पालन की मुहीम. किसानों को मिश्रित खेती से आय बढ़ाने के अवसर मिले हैं, रेशम कीट पालन को बढ़ावा भी मिला है, नार्थ ईस्ट के बाद बागेश्वर के कपकोट क्षेत्र में मूंगा रेशम को बढ़ावा देने पर केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता है.

ब्रजेश रतूड़ी, जनपद प्रभारी –

रेशम कीट पालन की दिशा में केंद्र सरकार की योजना मेरा रेशम मेरा अभियान देश के 250 जिलों में जारी है. बागेश्वर भी उनमें एक है. गरुड़ विकास खंड में 4 एकड़ भूमि में रेशम कीट पालन के लिए शहतूत के पौधे लगाए गए हैं 1968 में लगाए गए शहतूत के पौधे आज भी मौजूद हैं. विकास खंड में 76 किसान सिल्क समग्र योजना का लाभ उठा रहे हैं. सिल्क समग्र योजना अनुसूचित जाति बाहुल्य गावों के लिए प्राथमिक तौर पर लागू है. साथ ही रेशम कीट पालन योजना से जीराम जी के तहत सभी के लिए अवसर मौजूद हैं.

स्नेहा जोशी, गरुड़ ब्लॉक प्रभारी –

कीट पालन के लिए सरकार की ओर से 90 हजार का अनुदान देय होता है जिसमे 10% राशी कीट पालकों को व्यय करनी होती है. साथ में आवश्यक उपकरण रेशम विभाग की ओर से उपलब्ध कराए जाते हैँ, समय समय पर किसानों को तकनिकी जानकारी तथा प्रशिक्षण दिया जाता हैँ.

विगत सीजन में सर्वाधिक कोकून 22 के जी. प्राप्त किया दुदिला की कीट पालक जानकी देवी ने, डंगोली निवासी कमला देवी 15 केजी. दुर्गा देवी, कोटली 15 केजी, गीता देवी पुरड़ा 15 केजी, शोभा देवी गड़शेर 15 केजी, कमला देवी गड़शेर 15 केजी.

डॉ विक्रम कुमार, साइंटिस्ट सी – रेशम कीट पालन के लिए गरुड़ क्षेत्र बहुत सटीक है, यहाँ का वातावरण रेशम कीट पालन और शहतूत प्लांटेशन के लिए उपयुक्त हैं. किसान की उपज की अच्छी कीमत उसको घर पे ही मिल जाती है.

अक्टूबर और मार्च में गरुड़ विकास खंड में रेशम कीट पालकों के लिए खुला बाजार लगता हैं जहाँ किसान प्राप्त कोकून को 600 रुपए प्रति किलो की दर से बेच सकते हैं. प्राप्त कोकून को रेशम फेडरेशन और रेशम बोर्ड खरीद लेता है कीट पालक को मार्केटिंग के लिए कहीं भटकने की आवश्यकता नहीं होती.

कमला देवी, कीट पालक डंगोली – मैं दो साल से रेशम कीट पालन से जुड़ी हूं विगत सीजन में मैंने 15 किलो कोकून बेचा. शुरू में चुनौतियाँ तो थी, देखभाल संबंधी और अन्य जानकारिया विभाग से मिली और अपना वेयर हाउस भी विभाग के अनुदान से तैयार किया. धान गेहूं को जंगली जानवर चट कर जाते हैं ऐसे में रेशम कीट पालन मुनाफे का काम है.

के. एस. चौहान, विशेषज्ञ – रेशम कीट पालन के लिए शहतूत सबसे अच्छा पौधा है, वर्षों तक पत्ते, फल दे सकता है. शुरू में कीट पालकों को धैर्य रखना होगा, बिमारियों से कोकून और पत्तों को बचाना होगा, प्रशिक्षण और मेहनत के साथ कीट पालक गुणवत्ता पूर्ण कोकून पैदा कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.

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