सड़क नहीं तो भविष्य नहीं: पूर्व मुख्यमंत्री कोश्यारी के गृह क्षेत्र कपकोट में वार्ता विफल, बारिश में भी डटे ग्रामीण
विपिन जोशी, स्वर स्वतंत्र
बागेश्वर जिले के कपकोट स्थित पीडब्लूडी गेस्ट हाउस में फुलवाड़ी-खाईंधार सड़क निर्माण की मांग को लेकर संघर्ष समिति और पूर्व राज्यपाल व पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के बीच हुई वार्ता बेनतीजा रही। अपने ही गृह क्षेत्र में ग्रामीणों की वाजिब मांग और मुख्यमंत्री से सीधी बातचीत की शर्त पर कोश्यारी की मध्यस्थता नाकाम हो गई, जिसके बाद ग्रामीणों ने आंदोलन को और तेज करने का ऐलान कर दिया है।
सड़क संघर्ष के इसी सिलसिले में आज, 18 अगस्त 2026 को आंदोलन स्थल पर 71 वर्षीय शेर सिंह दानू और 49 वर्षीय टीका सिंह फर्शवाण सांकेतिक क्रमिक अनशन पर बैठे।
वार्ता में क्यों बनी असहमति की स्थिति?
बीते कल, 17 अगस्त को संघर्ष समिति का एक शिष्टमंडल कपकोट पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री कोश्यारी से मिला था। ग्रामीणों ने ज्ञापन सौंपकर एक सीधी और स्पष्ट मांग रखी थी:
* मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से दूरभाष पर सीधी वार्ता करवाई जाए।
* मुख्यमंत्री कागजी बाधाओं को दूर कर धरातल पर सड़क बनने तक स्वयं इसकी निगरानी का आश्वासन दें।
* यदि मुख्यमंत्री की ओर से यह भरोसा मिलता है, तो आंदोलन स्थगित कर दिया जाएगा।
हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री कोश्यारी ने मुख्यमंत्री से सीधी बात कराने के बजाय फाइल की अद्यतन स्थिति जानने के लिए शासन/विभाग से बात करने और प्रगति की जानकारी फोन पर देने का आश्वासन दिया। संघर्ष समिति इस बात पर अडिग रही कि जब तक शीर्ष स्तर से सीधी गारंटी और त्वरित निस्तारण का ठोस भरोसा नहीं मिलता, तब तक आंदोलन वापस नहीं होगा।
धरातल की हकीकत: “सड़क बनाओ, गांव का भविष्य बचाओ”
पहाड़ों में लगातार हो रही भारी बारिश के बावजूद दर्जनों ग्रामीण दिनभर आंदोलन स्थल पर डटे रहे। ग्रामीणों का कहना है कि फुलवाड़ी, फुलाचौंरा, थलीधार, खाईंधार और ठांग धार के लिए यह सड़क केवल डामर और गिट्टी का मुद्दा नहीं, बल्कि उनके जीवन और अस्तित्व की लड़ाई है।
> “सड़क सीधे-सीधे हमारे जीवन और बच्चों के भविष्य से जुड़ी है। अगर यहाँ शीघ्र सड़क नहीं बनती, तो इन गाँवों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। हमने जो अलख जगाई है, वह सड़क निर्माण शुरू होने तक नहीं बुझेगी।
आंदोलन स्थल पर डटे ग्रामीण
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने साफ कर दिया है कि आंदोलन अब अपने निर्णायक दौर में है। इस मौके पर संघर्ष समिति के अध्यक्ष पूर्व कैप्टन रतन सिंह दानू, संरक्षक चरण सिंह बघरी, सचिव करम सिंह दानू, उपाध्यक्ष शेर सिंह दानू, गजेंद्र सिंह धामी, मधन सिंह धामी, प्रताप सिंह धामी, भूपाल सिंह बघरी, प्रताप सिंह बघरी, मोहित धामी, तारा धामी और मोहनी देवी सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे।
गाँव वालों ने एक सुर में स्पष्ट संदेश दिया है— जब तक धरातल पर काम शुरू नहीं होता, तब तक संघर्ष बदस्तूर जारी रहेगा।


















