तितरी गांव में वैज्ञानिकों ने दिए रेशमकीट पालन के गुर, ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान’ अभियान के तहत 16 किसानों ने लिया व्यावहारिक प्रशिक्षण
तितरी (स्याल्देह/देघाट):
केंद्रीय रेशम बोर्ड (वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार) के राष्ट्रीय वृहद् रेशम प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अभियान ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान (MRMA 2.0)’ के तहत मंगलवार को विकासखंड स्याल्देह के ग्राम तितरी में “वैज्ञानिक रेशमकीट पालन पद्धतियां” विषय पर एक दिवसीय प्रौद्योगिकी प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। क्षेत्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान केंद्र (RSRS), सहसपुर, देहरादून और रेशम निदेशालय, उत्तराखंड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र के 16 रेशम कृषकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषकों को वैज्ञानिक तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान देकर कोकून की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता को बढ़ाना था।
वैज्ञानिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन
RSRS सहसपुर के प्रमुख एवं वैज्ञानिक-डी डॉ. पवन सैनी ने कृषकों को रेशमकीट पालन की पूरी प्रक्रिया का चरणबद्ध प्रदर्शन कराया:
विसंक्रमण एवं स्वच्छता: सैनिटेक, डेकॉल और ब्लीचिंग पाउडर के सही उपयोग से पालन गृह व उपकरणों को कीटाणुरहित करने की विधि बताई गई।
मोल्ट एवं कीट प्रबंधन: रेशमकीट की निद्रा अवस्था (मोल्ट) की सही पहचान, मोल्ट के बाद पुनः आहार देने का सही समय, और पालन गृह में उचित वायु संचार व स्थान प्रबंधन पर बल दिया गया।
रोग रोकथाम: स्वस्थ और रोगग्रस्त कीटों की छंटाई का तरीका सिखाया गया। रोगों से बचाव के लिए बुझा हुआ चूना (Slaked Lime) और ‘विजेता’ (Vijetha) के संतुलित प्रयोग की जानकारी दी गई।
माउंटिंग, कटाई व विपणन: परिपक्व कीटों को सही समय पर माउंटेज पर चढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण कोकून की कटाई, सुरक्षित भंडारण और विपणन की वैज्ञानिक सावधानियों से अवगत कराया गया।
वैज्ञानिक–कृषक संवाद एवं समाधान
कार्यक्रम के दौरान आयोजित विशेष संवाद सत्र में किसानों ने कीट पालन के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं और रोग प्रकोप से जुड़ी चुनौतियों को साझा किया। डॉ. सैनी ने किसानों के प्रश्नों के वैज्ञानिक समाधान दिए और MRMA 2.0 के तहत भविष्य के तकनीकी मार्गदर्शन के लिए उनके सुझाव दर्ज किए।
ग्राम प्रधान ने की सराहना
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं ग्राम प्रधान श्रीमती दीपा देवी ने ग्रामीणों को वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर उन्हें MRMA 2.0 स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में स्याल्देह के निरीक्षक श्री मनीष कुमार, श्री ध्यान सिंह और श्री जगदीश कुमार ने भी विचार व्यक्त करते हुए किसानों को उन्नत तकनीकों से जुड़ने का आह्वान किया।




















