आधी रात का ‘शराब खेल’—वैध परमिट, सरकारी माल.फिर रास्ते में कैसे गायब हुईं ?
क्या उत्तराखंड में वैध परमिट की आड़ में अवैध शराब तस्करी का कोई बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है? बैजनाथ पुलिस की हालिया कार्रवाई ने एक ऐसे ही सनसनीखेज घालमेल की तरफ इशारा किया है, जिसने आबकारी विभाग से लेकर पुलिस महकमे तक को हिलाकर रख दिया है।
कागजों पर सब ‘ओके’ था, परमिट सरकारी था, शराब भी सरकारी थी. लेकिन बीच रास्ते में ही 47 पेटियां गायब हो गईं! आखिर आधी रात के इस खेल का ‘मास्टरमाइंड’ कौन है?
‘डंगोली-ग्वालदम रोड पर आधी रात का सस्पेंस
घटना की रात करीब पौने दो बजे, जब पूरा गरुड़ सो रहा था, तब बैजनाथ पुलिस डंगोली-ग्वालदम रोड पर मुस्तैद थी। इसी दौरान एक पिकअप UK03CA2114 को चेकिंग के लिए रोका गया। पुलिस को उम्मीद थी कि यह एक सामान्य चेकिंग होगी, लेकिन गाड़ी की तलाशी लेते ही अधिकारियों के होश उड़ गए।
बरामदगी: पिकअप UK03CA2114 से लगभग 103 पेटी अंग्रेजी शराब बरामद हुई। जब पुलिस ने चालक से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने जो उगलवाया वो चौंकाने वाला था। चालक ने कबूल किया कि गाड़ी में कुल 150 पेटियां लोड थीं, जिनमें से 47 पेटियां वह पहले ही रास्ते में कहीं उतार चुका था। आख़िर कहाँ उतरी ये पेटियां ?
बड़ा सवाल: अगर परमिट 150 पेटियों का था, तो तय ठिकाने पर पहुंचने से पहले ही 47 पेटियां आबकारी की नजरों से बचकर किस ‘गुप्त ठिकाने’ पर उतारी गईं? वह कौन रसूखदार है, क्या वह कोई सफेद पोश है ? जिसके लिए सरकारी सिस्टम की नाक के नीचे यह खेप डंप की जा रही थी?
सफेदपोशों और रसूखदारों पर टिक गई सुई
सूत्रों की मानें तो यह सिर्फ एक चालक की चालाकी नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक तगड़ा सफेदपोश शराब सिंडिकेट काम कर रहा है। बैजनाथ और बागेश्वर के नगर क्षेत्रों में चर्चाएं आम हैं कि इस खेल के तार प्रदेश के कुछ बड़े और रसूखदार चेहरों से जुड़े हैं।
यही वजह है कि अब स्थानीय नागरिक और जागरूक जनता नगर क्षेत्र में लगे CCTV फुटेज के अवलोकन (जांच) की मांग कर रही है। यदि पुलिस निष्पक्षता से मुख्य चौराहों और डंपिंग रूट के कैमरों को खंगालती है, तो कई ‘सफेद कॉलर’ बेनकाब हो सकते हैं।
इस बड़ी कार्रवाई के बाद सीओ बागेश्वर अजय साह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले की पुष्टि की है। सीओ ने साफ कहा है कि:
पुलिस हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है। इस तस्करी नेटवर्क में जो भी लोग शामिल हैं, उनका बहुत जल्द भंडाफोड़ किया जाएगा।”
लेकिन जनता के बीच अब भी दो ही सवाल तैर रहे हैं—
1. क्या बैजनाथ कोतवाली टीम इस सिंडिकेट की आखिरी कड़ी तक पहुंचकर एक ऐतिहासिक पर्दाफाश करेगी?
2. या फिर हमेशा की तरह मोहरों को जेल भेजकर, असली ‘मगरमच्छों’ को बचाने के लिए मामले की लीपापोती कर दी जाएगी?
हमारी नजर इस खबर पर लगातार बनी हुई है। पुलिस की अगली तफ्तीश और सीसीटीवी फुटेज की जांच से जुड़े हर अपडेट के लिए बने रहिए हमारे साथ।


















