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सड़क या सुलगती मुसीबत?

सड़क या सुलगती मुसीबत? 20 साल से बदहाली के आंसू रो रहा बैगांव कालारौ, जश्न में डूबे नेताओं से ग्रामीणों का तीखा सवाल
विपिन जोशी,स्वर स्वतंत्र
विकास के बड़े-बड़े दावों और जश्न के शोर के बीच गरुड़ विकासखंड का दूरस्थ गांव बैगांव कालारौ आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। डंगोली से बैगांव कालारौ तक की करीब 22 किलोमीटर लंबी सड़क पिछले दो दशकों से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है, लेकिन शासन-प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों तक, कोई भी इस सड़क की सुध लेने को तैयार नहीं है।
ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की पड़ताल जरूरी है एक ग्रामीण महिला ने तो दो टूक शब्दों में कहा कि विधायक की बात छोड़ो हमारे यहाँ तो जीतने के बाद जिला पंचायत सदस्य भी नहीं पहुँचे हैं। स्कूल की हालत ख़राब है , नज़दीक में कोई हॉस्पिटल भी नहीं है, जखेड़ा में एक केंद्र है लेकिन वहाँ कोई सुविधा नहीं है। मूलभूत सुविधाओं का अभाव झेल रही लाहुर घाटी पर माननीयों की नजर क्यों नहीं पहुँचती है ? यह बड़ा गंभीर सवाल है। प्रशासन बड़ी साबित से तमाम मुद्दों से निकल लेता है, जानता के पास तहसील दिवस में गुहार लगाने के अलावा कोई चारा नहीं बचता है लेकिन अधिकांश तहसील दिवसों में भी समस्याओं का अंबार तो लगता है लेकिन समाधान के नाम पर मायूसी ही नजर आती है।
लाहुर घाटी की बदहाल सड़क पर क्या कहते हैं स्थानीय –
तारा सिंह स्थानीय निवासी
लगभग 20 साल पहले इस मार्ग पर सड़क का निर्माण हुआ था, जो आज पूरी तरह मलबे और गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। सड़क का डामर सालों पहले उखड़ चुका है और अब यहाँ सिर्फ जानलेवा गड्ढे बचे हैं। हमारी सुध कोई नहीं लेता सड़क, अस्पताल जैसी सुविधाएं भी हमको ठीक से नहीं मिल रही है ।

ग्रामीण विकास की कहानी बया करता गांव
ग्रामीण विकास की कहानी बया करता गांव

विनोद सिंह,ग्राम बैगांव कालारौ –
सड़क के किनारे नालियों का निर्माण न होने के कारण स्थिति और भयानक हो गई है। वर्तमान में जारी मानसून की बारिश ने इस पूरी सड़क को एक तालाब का रूप दे दिया है। सबसे ज्यादा डराने वाली बात यह है कि बैगांव कालारौ ग्राम पंचायत की पूरी बस्ती इस जर्जर रोड के ठीक नीचे बसी है। सड़क पर जमा पानी और कीचड़ कभी भी नीचे रह रहे परिवारों के लिए बड़ी आपदा का कारण बन सकता है।
सड़क की इस दुर्दशा को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
स्थानीय ग्रामीण सुंदर सिंह
ने व्यवस्था पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा – जनप्रतिनिधि कभी अपनी सरकार के 12 साल का जश्न मना रहे हैं, तो कभी 5 साल का। लेकिन धरातल की हकीकत यह है कि दर्जन भर गांवों को विकासखंड और तहसील मुख्यालय से जोड़ने वाली मुख्य सड़क खुद अपनी जिंदगी की भीख मांग रही है। अगर सरकार ने वाकई विकास किया है, तो हमारी यह सड़क इतनी बदहाल क्यों है?
यह सड़क सिर्फ एक रास्ता नहीं, बल्कि क्षेत्र के दर्जनों गांवों की लाइफलाइन है। ग्रामीणों को इलाज, राशन और बच्चों की शिक्षा के लिए इसी मार्ग से होकर गरुड़ और तहसील मुख्यालय जाना पड़ता है। आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना किसी जंग जीतने जैसा हो जाता है।
आखिर कब टूटेगी सिस्टम की नींद? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है या इस बार बैगांव कालारौ के ग्रामीणों को उनके हक की सुरक्षित सड़क मिलेगी?
संबंधित विभाग की प्रतिक्रिया –
अधिशासी अभियंता, लोनिवि, बागेश्वर – लोकल लेवल पर तैनात ए ई को सूचित कर दिया है तुरंत जल भराव की निकासी की जाएगी।
विमल, ए ई लोनिवि, गरुड़ – सूचना मिलने के बाद मशीन गाव में भेज रहे हैं जल्दी ही उक्त सड़क को जल भराव से मुक्त किया जाएगा।

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