पेट्रोल में एथनॉल का ‘ब्लास्ट’: क्यों खराब हो रहे हैं पुराने वाहन और कौन कमा रहा है असली मुनाफा?
विपिन जोशी…
भारत में E20 पेट्रोल (80% पेट्रोल + 20% एथनॉल) को लेकर इस समय सोशल मीडिया से लेकर सुप्रीम कोर्ट और आम जनता के बीच एक बड़ी बहस छिड़ गई है। एक तरफ जहां सरकार इसे देश की ऊर्जा सुरक्षा और किसानों के लिए ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं दूसरी तरफ पुराने वाहन मालिक (विशेषकर 2023 से पहले के वाहन) माइलेज में गिरावट और इंजन की खराबी की शिकायतें कर रहे हैं , उनका कहना है कि बुनियादी ढांचे और पुरानी गाड़ियों की तकनीकी सीमाओं को पूरी तरह से हल किए बिना, देश में आम उपभोक्ताओं के पास केवल E20 पेट्रोल खरीदने का ही विकल्प बचा है जो नुकसानदायक है, सरकार ने आम जनता को प्रयोगशाला समझ लिया है ।
एथनॉल मूल रूप से बायोमास (जैसे गन्ना या अनाज) से बनने वाला एक तरह का अल्कोहल है। पेट्रोल में इसे मिलाने पर गाड़ियों में दो मुख्य रासायनिक कारणों से समस्याएं आ रही हैं।
सॉल्वेंट इफ़ेक्ट – अल्कोहल एक बेहतरीन सॉल्वेंट (घोलने वाला पदार्थ) है। साल 2023 से पहले बनी गाड़ियों (BS4 या शुरुआती BS6 मॉडल) के फ्यूल पाइप, रबर सील और प्लास्टिक कनेक्टर्स केवल शुद्ध पेट्रोल के हिसाब से डिजाइन किए गए थे। जब E20 पेट्रोल इन हिस्सों से लगातार गुजरता है, तो एथनॉल रबर और प्लास्टिक को धीरे-धीरे गला देता है, जिससे वे सख्त होकर टूट जाते हैं और फ्यूल लीक होने लगता है।
नमी सोखना ,एथनॉल हवा से नमी (पानी) सोखता है। यदि गाड़ी कई दिनों तक खड़ी रहे, तो ईंधन टैंक के अंदर का एथनॉल पानी सोख लेता है। यह पानी पेट्रोल से अलग होकर टैंक के निचले हिस्से में बैठ जाता है, जिससे लोहे के टैंक में जंग लगने लगती है। जब गाड़ी स्टार्ट होती है, तो यह जंग फ्यूल पंप और डेलिकेट फ्यूल इंजेक्टर्स को जाम कर देती है।
माइलेज में गिरावट – एथनॉल का ऊर्जा घनत्व शुद्ध पेट्रोल से कम होता है। लोकलसर्कल्स द्वारा जुलाई 2026 में जारी एक सर्वे के अनुसार, 66% पुराने वाहन मालिकों ने 10% से अधिक माइलेज गिरने की शिकायत की है, हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय और ARAI के लैबोरेट्री टेस्ट में यह गिरावट केवल 2 से 4% ही आंकी गई है।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के दोनों बेटों—निखिल गडकरी और सारंग गडकरी का भारत के एथनॉल और एग्रो-बिजनेस सेक्टर में एक बड़ा कारोबारी आधार है। हाल के वर्षों में सरकार की 20% एथनॉल ब्लेंडिंग (E20) नीति के आने के बाद उनकी कंपनियों के राजस्व और वित्तीय स्थिति में अप्रत्याशित उछाल देखा गया है।
कारोबारी भूमिका और उनकी कंपनियों की कमाई के वर्तमान आंकड़े निम्नलिखित हैं:
1. दोनों बेटों की कंपनियों में भूमिका
गडकरी परिवार का मुख्य व्यवसाय शुरू में पूर्ति ग्रुप (Purti Group) के नाम से जाना जाता था, जिसका बाद में विस्तार किया गया। वर्तमान में दोनों भाई अलग-अलग प्रमुख कंपनियों की कमान संभालते हैं:
निखिल गडकरी ये मुख्य रूप से CIAN एग्रो इंडस्ट्रीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। यह स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड कंपनी है। निखिल गडकरी के पास इस कंपनी के प्रमोटर ग्रुप के माध्यम से एक बड़ा शेयर हिस्सा है।
सारंग गडकरी ये मुख्य रूप से मानस एग्रो इंडस्ट्रीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की कमान संभालते हैं और इसमें होल-टाइम डायरेक्टर के रूप में सक्रिय हैं। यह कंपनी मुख्य रूप से चीनी मिल, बिजली उत्पादन और एथनॉल डिस्टिलरी यूनिट्स चलाती है।
कॉर्पोरेट कनेक्शन – व्यावसायिक रणनीति के तहत CIAN एग्रो ने आक्रामक विस्तार करते हुए ‘मानस एग्रो इंडस्ट्रीज’ को अपनी सब्सिडियरी (सहायक कंपनी) के रूप में अपने अंतर्गत शामिल कर लिया है। इसके अलावा सारंग गडकरी वेनगंगा शुगर एंड पावर लिमिटेड जैसी अन्य एथनॉल उत्पादक इकाइयों में भी निदेशक हैं।
कंपनियां कितना कमा रही हैं?
सरकार की आक्रामक एथनॉल नीति और जनवरी 2024 में कार्बन डाइऑक्साइड से एथनॉल बनाने के लिए किए गए एमओयू के बाद इन कंपनियों की वित्तीय स्थिति में अभूतपूर्व उछाल आया है।
वित्तीय रिपोर्टों के आधार पर उनकी कंपनियों की आय के आंकड़े इस प्रकार हैं – CIAN एग्रो इंडस्ट्रीज (प्रबंधक: निखिल गडकरी) राजस्व में उछाल – जो कंपनी वर्ष 2024 की शुरुआती तिमाहियों में मात्र ₹17 करोड़ प्रति तिमाही के आसपास का व्यापार कर रही थी, उसने एठनॉल सेक्टर में कदम बढ़ाने और कंपनियों के विलय के बाद अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की।
सालाना टर्नओवर – वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का कंसोलिडेटेड सेल्स (कुल बिक्री राजस्व) लगभग ₹1,029 करोड़ दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष (~₹171 करोड़) के मुकाबले कई गुना अधिक था। ट्रेलिंग ट्वेल्व मंथ्स (TTM) के आंकड़ों के अनुसार 2026 तक यह रन-रेट ₹1,200 करोड़ से ₹1,500 करोड़** वार्षिक के बीच पहुंच चुका है। शुद्ध मुनाफा वित्त वर्ष 2024 में कंपनी का मुनाफा करीब ₹5 करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर लगभग ₹41 करोड़ और चालू अवधियों के ट्रेलिंग बेसिस पर करीब ₹93 करोड़ के स्तर को छू रहा है।
मानस एग्रो इंडस्ट्रीज (प्रबंधक: सारंग गडकरी)
सालाना टर्नओवर: यह एक अनलिस्टेड पब्लिक कंपनी है जो मुख्य रूप से जमीनी स्तर पर विनिर्माण, शुगर प्रोसेसिंग और डिस्टिलरी का काम देखती है। कॉर्पोरेट रजिस्ट्रार के वित्तीय रिकॉर्ड के अनुसार, मानस एग्रो का कुल परिचालन राजस्व ₹750 करोड़ से ₹1,000 करोड़ सालाना के दायरे में है।
राजनीतिक विवाद और कॉर्पोरेट पक्ष
नितिन गडकरी देश में एथनॉल नीति और फ्लेक्स-फ्यूल के सबसे बड़े समर्थक और नीति-निर्माता हैं, जबकि उनके बेटे उसी सेक्टर की कंपनियों को चला रहे हैं। इस कारण समय-समय पर विपक्ष और आलोचकों द्वारा ‘हितों के टकराव’ के आरोप लगाए जाते रहे हैं। सरकारी नीतियों (जैसे E20 अनिवार्य करना और एथनॉल की कीमतें फिक्स करना) का सीधा वित्तीय लाभ केंद्रीय मंत्री के परिवार से जुड़ी कंपनियों को मिल रहा है, जिससे CIAN जैसी कंपनियों के शेयर वैल्यू में रिकॉर्ड तेजी देखी गई है ।


















