विपिन जोशी…
बागेश्वर की सियासत में भूचाल: तीन बच्चों के पिता होने पर जिला पंचायत सदस्य की सदस्यता रद्द!
बागेश्वर (उत्तराखंड):उत्तराखंड की पंचायतीराज व्यवस्था में नियमों की अनदेखी भारी पड़ गई है। बागेश्वर जिले के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र-04, असों से निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य कुंदन राम की कुर्सी छिन गई है। उन पर ‘दो से अधिक संतान’ होने का नियम भारी पड़ा है। मुख्य विकास अधिकारी (CDO) एवं विहित प्राधिकारी आर.सी. तिवारी द्वारा जारी आदेश ने पूरे जिले की राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
क्या था पूरा मामला?
कुंदन राम पर आरोप था कि उन्होंने चुनाव के दौरान अपनी तीसरी संतान की जानकारी छिपाई थी। शिकायतों के बाद शासन स्तर पर हलचल हुई और मामले की गंभीरता को देखते हुए निदेशक पंचायतीराज, उत्तराखंड ने तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया।
साक्ष्यों ने खोल दी पोल
जांच समिति ने कोई भी कसर नहीं छोड़ी। परियोजना निदेशक (DRDA), जिला पंचायतराज अधिकारी और बागेश्वर के खण्ड विकास अधिकारी ने दस्तावेजों का ऐसा जाल बुना कि कुंदन राम का बचाव करना नामुमकिन हो गया:
दस्तावेजी सबूत:पोषण ट्रैकर एप, टीकाकरण पंजिकाएं और टेक होम राशन (THR) के रिकॉर्ड में तीसरी संतान का जिक्र पाया गया।
खुद की स्वीकारोक्ति: 6 सितंबर 2025 को कुंदन राम ने खुद एक गोदनामे में तीन जीवित संतान होने की बात स्वीकार की थी।
लिखित पुष्टि: जांच के दौरान समिति के सामने उन्होंने स्वयं तीसरी संतान के जन्म की बात लिखित में मानी।
कानून की सख्ती
उत्तराखंड पंचायतीराज (संशोधन) अध्यादेश, 2025 की धारा 90(1)(द) के तहत, दो से अधिक जीवित जैविक संतान होने पर कोई भी व्यक्ति जिला पंचायत सदस्य नहीं रह सकता। नियमों को ताक पर रखकर चुनाव लड़ने की यह भूल अब उनके राजनीतिक करियर पर भारी पड़ गई है। प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के बाद लिया गया है।
अब आगे क्या?
कुर्सी जाने के बाद क्या कुंदन राम इस फैसले को चुनौती देंगे? नियम के मुताबिक, आदेश मिलने के 15 दिनों के भीतर वे कुमाऊँ मंडल के मण्डलायुक्त के समक्ष अपील दायर कर सकते हैं। फिलहाल, क्षेत्र की जनता और राजनीतिक जानकारों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह कानूनी लड़ाई आगे बढ़ेगी या असों क्षेत्र में नए उप-चुनाव की आहट शुरू हो चुकी है।


















