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अतिक्रमण की कार्यवाही पर बवाल

विपिन जोशी..
गरुड़ में हाईकोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, एक ढांचा ध्वस्त; चार को मिली एक हफ्ते की मोहलत
गरुड़ (बागेश्वर)
उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में तहसील प्रशासन गरुड़ ने आज सुबह अतिक्रमण के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई शुरू की। इस दौरान प्रशासन ने जहां एक निर्माणाधीन ढांचे को ध्वस्त कर दिया, वहीं भारी हंगामे और ‘हाई वोल्टेज ड्रामे’ के बीच चार अन्य प्रभावितों को एक सप्ताह की मोहलत दी गई है। क्षेत्र में कुल 58 लोगों को अतिक्रमण के नोटिस जारी किए जा चुके हैं।

गरुड़ में अतिक्रमण पर मचा बवाल
गरुड़ में अतिक्रमण पर मचा बवाल

सुबह-सुबह शुरू हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
शनिवार सुबह तहसील प्रशासन की टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। प्रशासन ने सबसे पहले प्रकाश सिंह पुत्र मंगल सिंह के एक अर्धनिर्मित भवन (ढांचे) को मलबे में तब्दील कर दिया।
छत पर चढ़े प्रभावित, मिला स्थानीय नेताओं का साथ
प्रकाश सिंह के भवन पर कार्रवाई के बाद जैसे ही प्रशासन का बुलडोजर कुंवर सिंह थायत के मकान को ढहाने के लिए आगे बढ़ा, वहां स्थिति तनावपूर्ण हो गई। कुंवर सिंह थायत पुत्र किशन सिंह अपने मकान की छत पर खड़े हो गए और कार्रवाई का विरोध करने लगे। भावुक होते हुए उन्होंने कहा, “आज हम अपनी ही जमीन पर बेगाने हो गए हैं।”
इस दौरान स्थानीय जिला पंचायत सदस्य और अन्य ग्रामीण भी कुंवर सिंह के समर्थन में उतर आए और प्रशासन से समय देने की मांग की। काफी देर तक चले इस हाई वोल्टेज ड्रामे और जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन ने मानवीय आधार पर चार प्रभावितों को एक सप्ताह की राहत देने का फैसला किया।
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इन चार लोगों को मिली एक हफ्ते की मोहलत
प्रशासन की ओर से जिन चार लोगों को अपना अतिक्रमण खुद हटाने या व्यवस्था करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है,उनमें शामिल हैं:
तारा सिंह रावत पुत्र प्रकाश सिंह, शिव सिंह पुत्र तेज सिंह
बचे सिंह पुत्र राम सिंह कुंवर सिंह थायत, पुत्र किशन सिंह
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि एक सप्ताह की अवधि पूरी होते ही इन सभी के खिलाफ पुनः ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
समय को लेकर आमने-सामने प्रशासन और प्रभावित
मामले में नोटिस की अवधि को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। जहां एक ओर प्रभावित लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया, वहीं दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई अचानक नहीं की गई है, बल्कि इसके लिए साल 2019 से ही लगातार नोटिस जारी किए जा रहे थे।
क्या कहती हैं तहसीलदार?
इस पूरी कार्रवाई पर जानकारी देते हुए गरुड़ की तहसीलदार निशा रानी ने बताया:
“स्थानीय निवासी गोपाल चंद्र वनवासी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में दर्ज एक जनहित याचिका (PIL) का संज्ञान लेते हुए न्यायालय के आदेशानुसार यह ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने साल 2019 में ही सभी संबंधितों को बेदखली का नोटिस जारी कर दिया था। चूंकि यह हाईकोर्ट का सख्त आदेश है, इसलिए कार्रवाई होना तय है। फिलहाल चार लोगों को एक सप्ताह का समय दिया गया है, जिसके बाद पुनः विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।”

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