अधिकारों की अनदेखी पर भड़के उत्तराखंड के राज्य आंदोलनकारी, कांडा पड़ाव में धरना-प्रदर्शन कर दी चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
(बागेश्वर)
‘स्वर स्वतंत्र’ (विपिन जोशी)
उत्तराखंड: अलग राज्य निर्माण के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले राज्य आंदोलनकारियों के अधिकारों की आवाज एक बार फिर बुलंद हो गई है। बागेश्वर जनपद के चिह्नित राज्य आंदोलनकारियों को लंबे समय से प्रमाण पत्र न मिलने के कारण उनमें सरकार और प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। इसी क्रम में कांडा संगठन के बैनर तले आंदोलनकारियों ने कांडा पड़ाव में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
352 में से 340 आंदोलनकारी प्रमाण पत्र से वंचित, सौतेले व्यवहार का आरोप
धरना प्रदर्शन की अध्यक्षता कर रहे संगठन के अध्यक्ष बंशीधर कांडपाल ने कहा कि बागेश्वर जनपद के साथ लगातार उपेक्षा की जा रही है। जनपद में कुल 352 चिह्नित राज्य आंदोलनकारी हैं, जिनमें से महज 12 को ही प्रमाण पत्र मिल पाए हैं, जबकि 340 आंदोलनकारी आज भी अपने हक और पहचान (प्रमाण पत्र) के लिए भटक रहे हैं।
आंदोलनकारियों ने प्रशासन पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा
“जब पड़ोसी जनपद पिथौरागढ़ की तर्ज पर वहां के आंदोलनकारियों की लिस्ट जारी की जा सकती है, तो बागेश्वर जनपद के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों? आखिर जिला प्रशासन और सरकार हमारी जायज मांगों पर मौन क्यों साधे हुए है?”
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सरकारी योजनाओं के लाभ से महरूम हैं आंदोलनकारी
धरना स्थल पर मौजूद वक्ताओं ने तीखे शब्दों में कहा कि प्रमाण पत्र जारी न होने के कारण पात्र आंदोलनकारियों को सरकार द्वारा मिलने वाली विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, पेंशन और अन्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। यह उन लोगों का अपमान है जिन्होंने उत्तराखंड राज्य को अपने खून-पसीने से सींचा है। आंदोलनकारियों ने मांग की है कि सभी लंबित मामलों का त्वरित निस्तारण कर तत्काल प्रमाण पत्र वितरित किए जाएं।
उग्र आंदोलन और चुनाव बहिष्कार का अल्टीमेटम
प्रशासन के अड़ियल रवैये से नाराज उत्तराखंड चिह्नित राज्य आंदोलनकारियों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। संगठन ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि सरकार और जिला प्रशासन ने शीघ्र ही पिथौरागढ़ जनपद की तरह बागेश्वर की भी सूची जारी कर प्रमाण पत्र नहीं सौंपे, तो इस आंदोलन को अत्यंत उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। आंदोलनकारियों ने आने वाले चुनावों के पूर्ण बहिष्कार का भी शंखनाद कर दिया है।
प्रदर्शन में ये प्रमुख चेहरे रहे शामिल
अधिकारों की इस आवाज को बल देने के लिए कांडा पड़ाव में भारी संख्या में आंदोलनकारी जुटे। सरकार को चेतावनी देने वालों में मुख्य रूप से शामिल रहे:
बंशीधर कांडपाल (अध्यक्ष),जितेंद्र वर्मा,महेश पंत,प्रकाश तिवारी,सुरेश पंत,गंगा लाल वर्मा,हीरा सिंह कर्म्याल,,आलम मेहरा,बीरेंद्न
‘स्वर स्वतंत्र’ की ग्राउंड रिपोर्ट


















