विज्ञान जब समाज की सेवा करेगा,तभी चमकेगा भारत का भविष्य: प्रो. एच.सी. वर्मा
उत्तराखंड के शांत पर्वतीय अंचलों में इन दिनों विज्ञान की अनोखी अलख जग रही है। मौका है देश के सुप्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी, पद्मश्री से सम्मानित शिक्षाविद और आईआईटी कानपुर के पूर्व प्रोफेसर डॉ. एच.सी. वर्मा के बागेश्वर आगमन का। उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा है कि जब विज्ञान किताबों से निकलकर समाज की सेवा में लगेगा, तभी देश का वास्तविक विकास संभव है।
इस विज्ञान यात्रा की शुरुआत बेहद जादुई रही। बीते कल की रात राजकीय इंटर कॉलेज वज़्युला में बच्चों और शिक्षकों के चेहरे उस समय ख़ुशी से खिल उठे, जब प्रो. वर्मा ने उनके साथ बातचीत की। दूरबीन (टेलीस्कोप) के जरिए जब पहाड़ों के साफ़ आसमान में तारों और ग्रहों को निहारा गया, तो बच्चों का कौतूहल देखते ही बनता था।

अब इसी कड़ी में, 20 मई से डायट बागेश्वर में दो दिवसीय विशेष संवाद और प्रशिक्षण कार्यशाला का आगाज़ हो चुका है, जहाँ क्षेत्र के भौतिक विज्ञान शिक्षक और विज्ञान प्रेमी प्रो. वर्मा से सीधे रूबरू हो रहे हैं।
‘नो-कॉस्ट’ और ‘लो-कॉस्ट’ का जादू
प्रो. एच.सी. वर्मा सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि अपने आप में विज्ञान की एक चलती-फिरती पाठशाला हैं। जटिल से जटिल सिद्धांतों को रोज़मर्रा की चीज़ों से समझा देना उनकी खासियत है।
सोपान आश्रम की अनूठी पहल: आईआईटी कानपुर से सेवानिवृत्त होने के बाद प्रो. वर्मा कानपुर के ‘सोपान आश्रम’ से उन बच्चों के भविष्य को संवार रहे हैं, जिन तक पढ़ाई के साधन मुश्किल से पहुँच पाते हैं।
वे बीते कई सालों से बिना किसी खर्च (No-Cost) या बेहद कम खर्च (Low-Cost) वाले प्रयोगों के ज़रिए हज़ारों शिक्षकों और लाखों छात्रों को विज्ञान का दीवाना बना चुके हैं।
अपने जीवन के गौरवमयी 75 वर्ष पूरे करने पर प्रो. वर्मा आराम करने के बजाय उत्तराखंड के दूर-दराज़ के गाँवों में विज्ञान की अलख जगा रहे हैं। Science in the Service of Society’ संस्था के सहयोग से शुरू हुई इस उत्तराखंड विज्ञान यात्रा को बेहद खूबसूरत नाम दिया गया है— प्रयोग-यात्रा सरिता (प्रयास)
यह यात्रा उत्तराखंड के छह जिलों से होकर गुज़रेगी। इसका मुख्य उद्देश्य रटने वाली शिक्षा को अलविदा कहना है। शिक्षकों को ऐसा प्रशिक्षण दिया जा रहा है जिससे वे स्थानीय और बेकार पड़ी चीज़ों से विज्ञान के प्रयोग तैयार कर सकें, ताकि बच्चे विज्ञान को रटने के बजाय महसूस कर सकें। यह पूरी मुहिम नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के सपनों को धरातल पर उतारने जैसी है।
सिर्फ विज्ञान नहीं, सरोकार भी है
इस पूरी यात्रा में सहयोगी बनी संस्था ‘Science in the Service of Society’ उत्तराखंड के पहाड़ों में केवल विज्ञान ही नहीं फैला रही, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण, हिमालय बचाओ और नशा मुक्ति जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों पर भी लगातार काम कर रही है।
आयोजकों का मानना है कि यह आयोजन पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा की एक नई क्रांति की शुरुआत है। बागेश्वर और द्वाराहाट के पड़ावों को पार करते हुए इस यात्रा का भव्य समापन 1 जून को देहरादून में होगा, जहाँ भौतिकी (Physics) पर 6 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। उम्मीद है कि यह कार्यशाला शिक्षकों के भीतर एक नया जोश भर देगी।
प्रो. हरिश्चंद्र वर्मा का परिचय- (जन्म- 3 अप्रैल 1952)। आईआईटी कानपुर में भौतिकी में एमिरीटस प्रोफेसर। ‘concepts of physics’ पुस्तक के लिए विशेष लोकप्रियता। ‘studies of the electric field gradients in non-cubic metals’ विषय में पीएचडी। स्कूल और विश्वविद्यालय स्तर के लिए दर्जनों पाठ्य पुस्तकों का लेखन। दर्जनों विज्ञान पुस्तकें यथा क्वांटम फ़िज़िक्स, फ़ाउंडेशन साइन्स फ़िज़िक्स, भौतिकी की समझ, क्लासिकल इलेक्ट्रोमैगनेटिज्म आदि। विज्ञान शिक्षण के लिए 2017 में मौलाना अबुल कलाम आज़ाद पुरस्कार और 2021 में पद्मश्री सम्मान। न्यूक्लियर फ़िज़िक्स के क्षेत्र में 139 पेपर प्रकाशित। वह आईआईटी कानपुर के आस-पास रहने वाले निर्धन वर्ग के बच्चों के लिए शिक्षा सोपान नामक संस्था के माध्यम से विज्ञान शिक्षा का काम करते हैं। वह देश भर में घूमकर विज्ञान के प्रयोगों पर लाइव डेमोन्स्ट्रेशन करते हैं। प्रो.वर्मा ने 600 से अधिक सस्ते विज्ञान किट तैयार किए हैं, जिनका उपयोग शिक्षक कक्षा में कर सकते हैं। उन्होंने एक प्रोग्राम के तहत नेशनल अन्वेषिका नेटवर्क की स्थापना की है, जिसके वह राष्ट्रीय समन्वयक भी हैं।
विपिन जोशी,स्वर स्वतंत्र


















