विपिन जोशी,स्वर स्वतंत्र
प्रकृति की दोहरी मार
बागेश्वर में बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि से अन्नदाता पस्त
बागेश्वर। जनपद बागेश्वर में पिछले एक सप्ताह से जारी बेमौसमी बरसात ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। जहाँ एक ओर इस बारिश ने धधकते जंगलों की आग को शांत कर राहत पहुँचाई, वहीं दूसरी ओर किसानों के लिए यह ‘आसमान से बरसी आफत’ साबित हुई है। जनपद के कपकोट, कांडा, बागेश्वर, गरुड़ में भारी बारिश ने खेतों में खड़ी और कटी हुई गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुँचाया है।
कमस्यारघाटी, ओलों की मार से आजीविका पर संकट
सबसे भयावह स्थिति कांडा तहसील के अंतर्गत आने वाली कमस्यारघाटी में देखी गई। यहाँ हुई अचानक और भारी ओलावृष्टि ने किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। गेहूं की तैयार फसलें ओलों की मार से बिछ गई हैं, वहीं नकदी फसल के रूप में उगाई जा रही साग-भाजियों को भी भारी क्षति पहुँची है। बदहवास किसान अब तिरपाल और प्लास्टिक पन्नी के सहारे अपनी बची-खुची उपज बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं।
स्थानीय किसानों का कहना है कि उनकी आर्थिक कमर टूट चुकी है और अब उनके सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। क्षेत्र के प्रभावित काश्तकारों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द क्षति का सर्वे कराकर उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।
क्यों होती है यह बेमौसमी बरसात?
अक्सर मार्च और अप्रैल के अंत में होने वाली इस बारिश और ओलावृष्टि के पीछे मुख्य रूप से दो कारण होते हैं:
1. पश्चिमी विक्षोभ यह भूमध्य सागर से उठने वाली नमी युक्त हवाएं हैं। जब ये हवाएं हिमालय की ऊंची चोटियों से टकराती हैं, तो अचानक मौसम में बदलाव आता है और तीव्र गर्जना के साथ बारिश व ओलावृष्टि होती है।
2. जलवायु परिवर्तन ग्लोबल वार्मिंग के कारण स्थानीय स्तर पर तापमान में असंतुलन पैदा हो रहा है। अत्यधिक गर्मी के कारण हवा तेजी से ऊपर उठती है और बादलों का निर्माण करती है जिससे कम समय में भारी तबाही मचाने वाली ओलावृष्टि होती है।
मोहन सिंह, किसान, गरुड़

किसी तरह कर्जा लेकर गेहूँ मड़ाई के लिए छोटा थ्रेसर ख़रीदा गेहूँ की अच्छी फसल हुई थी बारिश सब चौपट कर रही है। थ्रेसर रात दिन व्यस्त रहता था गेहूं के ढेर लगे रहते थे अब बारिश नहीं रुकी तो खेतों में रखा गेहूं कब सूखेगा और कब माना जाएगा । नुकसान बहुत हो रहा है । न गेहूं मिलेगा न थ्रेसर की किश्त ।
चंद्र शेखर पांडे प्रगतिशील किसान-

बेमौसमी बारिश ने इस बार भारी नुकसान पहुंचाया है, मौसम विभाग की माने तो कुछ और दिन बरसात का अनुमान है। मैंने 50 नाली जमीन में काला गेहूँ लगाया था उम्मीद थी कि अच्छा मुनाफा होगा लेकिन बारिश से काफ़ी नुक़सान हुआ है। गेहूँ कटान में भी दिक्कतें हो रही हैं ।
लाल सिंह, मझार चौरा, सब्जी उत्पादक-

बारिश समय पर हो और नियंत्रित रूप में हो तो किसान के लिए वरदान है यही बारिश असमय हो जाए तो किसानों को भारी नुकसान भी होता है। सब्जी और गेहूं की फसल को नुकसान तो पहुँच ही रहा है यदि कुछ दिन और बारिश होती है तो गेहूं की बची हुई खड़ी फसल खराब हो जाएगी, सरकार कितना मुवावजा देगी यह अलग बात है, उस मुआवजे से भी कितनी राहत मिलेगी ?
पुष्पा नेगी, भकुनखोला

हमने बीस नाली जमीन में इस बार गेहूँ लगाया फसल भी अच्छी हुई लेकिन बारिश ने सब बर्बाद कर दिया। गेहूँ काट कर खेतों में रखें हैं कब सूखेंगे और कब मड़ाई होगी? यदि बरसात नहीं रुकी तो बहुत नुकसान होगा ।
कविता देवी, गरुड़- गेहूँ कटाई के समय इतनी बारिश पहली बार देखी । गेहूँ की फसल भी अच्छी हुई थी मौसम की ऐसी नज़र लगी कि गेहूँ खेत में ही सड़ने लगे हैं। साथ में आलू भी बर्बाद हो गया ।
प्रकृति के इस कहर के बाद अब सबकी नजरें प्रशासन पर टिकी हैं। किसानों का स्पष्ट कहना है कि यदि समय पर राहत राशि या बीमा का लाभ नहीं मिला, तो खेती से लोगों का मोहभंग होना निश्चित है।
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