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अडिग हौसले और गहराता आक्रोश

विपिन जोशी
गरुड़ में आंगनवाड़ी आंदोलन का 20वां दिन
जब नीव (आंगनवाड़ी) ही असुरक्षित है, तो विकास की इमारत कैसे मजबूत होगी?
मानदेय वृद्धि और सरकारी उपेक्षा के विरुद्ध आक्रोश

आंदोलन की ताज़ा स्थिति: अडिग हौसले, गहराता आक्रोश
गरुड़ में आंगनवाड़ी कार्यकर्तियों का धरना आज 23वें दिन भी जारी रहा। चिलचिलाती धूप और लंबे समय से काम ठप होने के बावजूद, अपनी मांगों को लेकर कार्यकर्तियों के तेवर ढीले नहीं पड़े हैं। “ग्राउंड जीरो” से साफ दिख रहा है कि यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि व्यवस्था के खिलाफ एक बड़े जनाक्रोश का रूप ले चुका है।
विपक्ष और जन प्रतिनिधियों का प्रहार
आंदोलन स्थल पर समर्थन देने पहुंचे जिला पंचायत सदस्य (कौसानी) बलवंत नेगी ने सरकार की नीतियों पर तीखे प्रहार किए। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु रहे:
डबल इंजन की विफलता: नेगी ने आरोप लगाया कि सरकार हर मोर्चे पर विफल है। जहाँ शिक्षक और कर्मचारी सड़कों पर हैं, वहीं सरकार केवल “मंचीय घोषणाओं” तक सीमित है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ₹9,000 का मानदेय आज के दौर में क्रूर मजाक है। आंगनवाड़ी कार्यकर्तियां प्रारंभिक शिक्षा और सरकारी योजनाओं के दस्तावेजीकरण की रीढ़ हैं, फिर भी उनकी आर्थिक सुरक्षा शून्य है।

आंगनवाड़ी धरना प्रदर्शन
आगनवाड़ी धरना प्रदर्शन गरुड़

“महिलाओं का सम्मान केवल भाषणों से नहीं, बल्कि शासन स्तर पर ठोस निर्णयों से होगा।”
आंदोलन को विपक्षी दलों का भारी समर्थन मिल रहा है, जिससे सत्ता पक्ष पर दबाव बढ़ गया है:
ललित फर्स्वाण (पूर्व विधायक, कपकोट): इन्होंने पहले ही आंदोलन को अपना समर्थन देकर इसे क्षेत्रीय अस्मिता से जोड़ दिया है।
भास्कर बोरा (यूकेडी): उत्तराखंड क्रांति दल ने भी कार्यकर्तियों के कंधे से कंधा मिलाकर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है।
बड़ा सवाल: प्रदेश अध्यक्ष विमला कोहली सहित अन्य प्रदर्शनकारियों का सबसे तीखा सवाल यही है कि जब विपक्ष और आम जनता उनके साथ है, तो सत्ता पक्ष और शासन इस मामले पर चुप्पी क्यों साधे हुए है?
प्रमुख मांगें जिन पर गतिरोध जारी है
1. मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि: वर्तमान ₹9,000 को बढ़ाकर महंगाई के अनुपात में 24000 करने की मांग।
2. कार्यदशाओं में सुधार: दस्तावेजीकरण और अतिरिक्त कार्यों के बोझ को कम करना।
3. रिटायरमेंट व अन्य लाभ: सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की मांग।

गरुड़ में 23 वे दिन भी धरना प्रदर्शन जारी
धरना प्रदर्शन आगनवाड़ी

यह धरना अब राज्य सरकार के लिए सिर दर्द बनने जा रहा है । यदि धामी सरकार ने जल्द ही ठोस वार्ता या मानदेय वृद्धि का निर्णय नहीं लिया, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में उग्र रूप ले सकता है। जनप्रतिनिधियों की “महंगी गाड़ियों” और “समारोहों” के बीच आंगनवाड़ी कार्यकर्तियों की यह “जमीनी लड़ाई” 2026 के राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती है।
जब नीव (आंगनवाड़ी) ही असुरक्षित है, तो विकास की इमारत कैसे मजबूत होगी?” — आंदोलन स्थल पर गूंजता आज का प्रमुख नारा।

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