विपिन जोशी..
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का अपनी मांगों को लेकर संघर्ष अब और अधिक मुखर होता जा रहा है।
गरुड़ में 15वें दिन भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का धरना जारी।
गरुड़ में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का आंदोलन अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले 15 दिनों से जारी इस विरोध प्रदर्शन को अब विभिन्न राजनैतिक दलों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। कांग्रेस के बाद, अब उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) ने भी खुलकर इस आंदोलन का समर्थन किया है।
प्रमुख बिंदु और राजनैतिक प्रतिक्रिया
UKD का समर्थन: यूकेडी यूथ के बागेश्वर जिलाध्यक्ष भास्कर बोरा अपनी कार्यकारिणी के साथ धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने कार्यकर्ताओं की मांगों को जायज ठहराते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।

न्यूनतम मानदेय का मुद्दा: भास्कर बोरा ने कहा कि सरकार इतने कम मानदेय पर कार्यकर्ताओं से अत्यधिक काम ले रही है, जबकि समाज, बच्चों और महिलाओं के उत्थान में इनका योगदान अतुलनीय है।
यूकेडी के कार्यकारी अध्यक्ष हीरा सिंह नेगी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार मातृ शक्ति की मांगों को अनदेखा कर रही है और राज्य में नशे के कारोबार को बढ़ावा देने में व्यस्त है। उन्होंने संकल्प लिया कि जब तक मांगें पूरी नहीं होती, यूकेडी कार्यकर्ता भी धरने पर बैठेंगे।
आंदोलन में शामिल रहे
धरने में मातृ शक्ति और राजनैतिक प्रतिनिधियों की भारी उपस्थिति रही। मुख्य रूप से निम्नलिखित लोग शामिल रहे:
प्रदेश अध्यक्ष, आंगनवाड़ी संगठन बिमला कोहली
UKD प्रतिनिधि भास्कर बोरा, हीरा सिंह नेगी, कैलाश चंदोला, विनोद पांडे |
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता रेशमा देवी, अनीता देवी, मंजू, रेखा वर्मा, कमला देवी, प्रेमा देवी, ममता, दया, रमा भरड़ा, चम्पा खोलिया सहित दर्जनों कार्यकर्ता ।
गरुड़ का यह आंदोलन अब केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें राजनैतिक हस्तक्षेप बढ़ने से प्रदेश सरकार पर दबाव और गहरा गया है। देखना यह होगा कि सरकार इस “मातृ शक्ति” के आक्रोश पर क्या प्रतिक्रिया देती है।


















