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प्रचार बनाम परिणाम

प्रचार मेंबेमिसाल‘, पर जवाबदेही मेंबदहाल‘: गरुड़ की घटना ने खोली व्यवस्था की पोल.

उत्तराखंड सरकार अपनी उपलब्धियों को जनता तक पहुचाने के लिएचार साल बेमिसालजैसे भव्य कार्यक्रमों का आयोजन कर रहीहै। लेकिन बागेश्वर जिले के गरुड़ ब्लॉक मुख्यालय में जो हुआ, उसने यह साफ कर दिया कि सरकार के दावों और जमीनी हकीकतके बीच मीलों का फासला है। जब सरकार के जश्न में खुद सरकार के ही नुमाइंदे (उच्चाधिकारी) पहुंचें, तो जनता के प्रति उनकीगंभीरता पर प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है।

अधिकारियों की गैरमौजूदगी तंत्र की बेरुखी ने बेमिसाल आयोजन को फीका कर दिया ।

कार्यक्रम का उद्देश्य जनता को सरकारी योजनाओं से रूबरू कराना था, लेकिन जिले और तहसील स्तर के उच्चाधिकारियों कीअनुपस्थिति ने इसे एक रस्म अदायगी बनाकर छोड़ दिया। ब्लॉक प्रमुख का सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के सामने बिफरना औरअपना आपा खोना यह दर्शाता है कि स्थानीय जन प्रतिनिधि भी अब अधिकारियों की इस कार्यशैली से घुटन महसूस कर रहे हैं। ब्लॉक प्रमुख को सुन कर लगा कि क्या अधिकारी खुद को जनता और उनके प्रतिनिधियों से ऊपर समझने लगे हैं? अगर ब्लॉकमुख्यालय के महत्वपूर्ण कार्यक्रम में उच्चाधिकारी नहीं पहुंचते, तो यह सीधे तौर पर शासन की अवहेलना है।

नेतृत्व का विरोधाभास आक्रोश और संतुलन भी देखने को मिला. एक तरफ जहाँ ब्लॉक प्रमुख का गुस्सा प्रशासनिक विफलता कोउजागर कर रहा था, वहीं जिला पंचायत अध्यक्ष शोभा आर्या ने एक परिपक्व राजनेता की तरह स्थिति को संभालने की कोशिश की।उन्होंने सरकारी योजनाओं की जानकारी दी और उपस्थित कार्यकर्ताओं का आभार जताया। हालांकि, यह सकारात्मक रुखसराहनीय है, लेकिन क्या यह उन बुनियादी कमियों को ढकने के लिए काफी है जो अधिकारियों की अनुपस्थिति से उजागर हुई हैं?

पूर्व विधायक ललित फर्सवाँन ने बेमिसाल आयोजन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं और चमकते विज्ञापनों के पीछेका अंधेरा भी जनता ने देखा। सरकार एक ओर करोड़ों रुपये खर्च कर अपनी ब्रांडिंग कर रही है, वहीं दूसरी ओर बागेश्वर जैसे पहाड़ीजिलों में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल किसी से छिपा नहीं है।

पूर्व विधायक की बातों में काफ़ी हद तक सच्चाई भी दिखी जिले में विशेषज्ञ डॉक्टरों का अभाव है अस्पतालों की इमारतें तो बन रही हैं, लेकिन उनमें बैठने वाले विशेषज्ञ डॉक्टर और आधुनिक मशीनें आज भी नदारद हैं।

रेफरल सेंटर बने अस्पताल: जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र महजरेफरल सेंटरबनकर रह गए हैं, जहाँ से मरीजों को हल्द्वानी याअल्मोड़ा रेफर कर दिया जाता है।

इमरजेंसी में बदहाली, पहाड़ की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में आज भी गर्भवती महिलाओं को डोली में ले जाने की खबरेंविज्ञापनों केविकासको चिढ़ाती नजर आती हैं।

इसलिए सरकार को दिखावे से इतर धरातल पर उतरना होगा उत्तराखंड की जनता कोबेमिसालआंकड़ों की नहीं, बल्किबेमिसालसुविधाओं की जरूरत है। गरुड़ विकासखण्ड की घटना यह चेतावनी है कि यदि नौकरशाही इसी तरह बेलगाम रही और योजनाओं काकेंद्र बिंदु केवल प्रचार बना रहा, तो जनता का विश्वास इस तंत्र से पूरी तरह उठ जाएगा। सरकार को चाहिए कि वह केवल आयोजनोंमें अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करे, बल्कि मूलभूत सुविधाओं जैसे अस्पतालों में डॉक्टरों की मौजूदगी भी अनिवार्य करे।

जनता का सवाल सीधा है, यदि चार साल वाकई बेमिसाल हैं, तो जिला प्रशासन और स्वास्थ्य, शिक्षा सेवाएं इतनी बदहाल क्यों हैं?

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