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अतिक्रमण के खिलाफ कार्यवाही

विपिन जोशी, संपादक स्वर स्वतंत्र.

गरूड़ बाजार में हाईकोर्ट के दिशा निर्देश पर आज तहसील प्रशासन ने पंजास चैराहे से गांधी चबूतरे तक अस्थाई अतिक्रमण के खिलाफ कार्यवाही की आज की कार्यवाही ने एसडीएम जितेन्द्र वर्मा द्वारा लगभग ऐसी ही एक अतिक्रमण के खिलाफ की गई कार्यवाही की याद दिला दी। क्या हाईकोर्ट का फैसला अब मात्र एक औपचारिकता बन गया है ? दृश्य तो कुछ ऐसा ही था। गरूड़ बाजार में कौन लोग व्यापारी हैं ? अस्थाई अतिक्रमण करने वाले कौन हैं ? व्यापारी, पत्रकार, जन प्रतिनिधि, आदि रसूखदार ही हैं तो बाजा़र क्षेत्र के असल मालिक हैं। अब इन रसूखदारों के खिलाफ कोई पत्रकार या समाजसेवी क्यों सामने आए ? इन अवसरों पर तथाकथित समाज सेवक काॅबों जनप्रतिनिधि भी बचते फिरते हैं। यह कोई पहली या सनसनी खेज घटना नही है। ऐसा अक्सर होता है। जब जब सत्ताधीस सामने होते हैं जब ऐसा रोचक और रोमांचक दृश्य हमारे सामने होता है। देखने वाले सत्ता और प्रशासन की जयजयकार करते हैं तो जिनके मामूली अस्थाई अतिक्रमण स्थल धवस्त होते हैं उनके मनों में एक ही सवाल रहता है कि हम ही क्यों ? बगल वाले सेठ जी जी क्यों नहीं ? गरूड़ बाजार ही नहीं प्रदेश भर में कितने सेठ जी लोगों के अस्थाई/स्थाई अतिक्रमणों पर बुल्डोजर चला है ? बहुत से उदाहरण हमारे सामने हैं लेकिन हम प्रतिक्रिया देने में सुस्त हो जाते हैं।

एक दर्जन से अधिक व्यापारी आज इसलिए खामोशा थे कि वो कहीं न कहीं सत्ताधीसों के निर्यणों में शामिल हैं या थे। दबी आजाज में एक महिला व्यापारी ने कहा कि हमने तो डर के मारे अपनी सीढी खुद ही हटा दी। दूसरी ओर प्रभावशाली भी दिखे जिनके आगे न तो बुल्डोजर चला न किसी अधिकारी या नेता की ही बात चली, कुछ व्यापारियों ने कहा कि हम खुद हटा देंगे अतिक्रमण लेकिन सवाल अपनी जगह है कि प्रशासन के नोटिस के बाद भी अस्थाई अतिक्रमण क्यों नही हटाया गया ? किसी अधिकारी के लिए यह साहस की बात है कि बाजार में बुल्डोजर चला दे। लेकिन ऐसे अधिकारी बहुत लंबा समय सत्ता के तमाम ठेकेदारों की आंखों में खटकते रहते हैं। इसलिए जनता के हक में काम करने वाले अधिकांश अधिकारियों के त्वरित तबादले आम प्रचलन में शामिल हो गए हैं।

व्यापारी हो नेता या पत्रकार जब अपने नफा नुकसान की बात वाया लीगल तरीके से आती है तो सब धीरे से पीछे हो जाते हैं। अगले दिन अखबारों में वर्जन और खबर भी मौसमानुसार रूख बदल लेते हैं। यह लोकतंत्र के लिए नुकसान दायक बात है। आज गरूड़ बाजार में अस्थाई अतिक्रमण के दौरान गाहे बगाहे व्यापारियों से ही सुना मैंने कैमरें पर बोलने से मना किया उन्होने तो सम्माान में कैमरा बंद किया, चाहता तो चश्में या कमीज की बटन मंे स्पाई कैमरा लगा कर वसूली मैं भी कर ही सकता था। मात्र तीन हजार में दुनियां भर के स्पाई कैमरे आज आॅन लाइन मौजूद हैं। लेकिन जनता की आवाज महत्वपूर्ण है, साथ मेें जरूरी हैं जन मुद्दे जिनके लिए बिना व्यक्तिगत लाभ के काम करना है. बहरहाल अतिक्रमण नहीं होगा तो आपको भी सड़क में आवाजाही सहज लगेगी।

क्या कहते हैं जिम्मेदार लोग ?

अंकित जोशी, सभासद नगर पंचायत गरूड़ वार्ड / अतिक्रमण के खिलाफ कार्यवाही का व्यापारिक बंधु सहयोग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन के सामने एक सवााल और भी है कि पूर्व से लंबित अतिक्रमण के मामलों में भी कार्यवाही होगी ?

तहसीलदार गरूड़, निशा रानी / प्रसिद्ध व्यापारी नेत्र सिंह ने बताया कि पहाड़ की सड़कों में अब पर्यटन के नाम पर सिर्फ सूखते गिरते बर्फ ही मिलेगी। बाहरी पर्यअकों को पूजा अर्चना करने के बाद मंदिर परिसर की सफाई तो अवश्य होगी।

जिला पंचायत सदस्य/व्यापार संघ अध्यक्ष, बलवंत नेगी / अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन की कार्यवाही ठीक शादी बरात के सीजन में उचित नहीं लगती है। प्रशासन उन 125 लंबित मामलों की जांच क्यों नहीं कर रहा। क्या अस्थाई अतिक्रमण की तर्ज पर पुराने मामलों पर भी कार्यवही होगी?

पूर्व प्रधान/सदस्य क्षेत्र पंचायत – प्रकाश कोहली ने बड़े तल्ख शब्दों में कहा कि गरूड़ प्रशासन ने आंखें मूंद ली है। पूर्व से लंबित अतिक्रमण मामले में प्रशासन कार्यवाही नहीं कर रहा हैं? जबकी छोटे व्यापारियों पर तुरंत कार्यवाही हो रही है।

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