Home » बड़ी खबर » अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन सख्त

अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन सख्त

गरुड़ अस्थाई अतिक्रमण स्वयं हटाए व्यापारी, अन्यथा प्रशासन का चलेगा बुलडोजर

गरूड़। माननीय उच्च न्यायालय के आदेशानुसार बागेश्वर जिले में हो रहे अस्थाई अतिक्रमण को हटाने के लिये आज गरुड़ में तहसीलदार निशा रानी के नेतृत्व में तहसील प्रशाशन की टीम गरुड़ बाजार,गोलू मार्केट, टीट बाजार, बैजनाथ क्षेत्र में अस्थाई अतिक्रमण को हटाने के लिये व्यापारियों को नोटिस देकर,अलाउंसमेंट कर सूचना दी। जिससे गरुड़ क्षेत्र के व्यापारियों में हड़कंप मच गया। तहसीलदार निशा रानी ने बताया कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशानुसार अस्थाई अतिक्रमण को हटाया जाना है। जिसके लिए सभी व्यापारियों को अस्थाई अतिक्रमण हटाने को कह दिया। कल तक का समय व्यापारियों को दिया गया है। रविवार 23 नवम्बर 2025 से तहसील प्रशाशन अस्थाई अतिक्रमण को हटाने की कार्यवाही करेगा। पूर्व ब्यापार मंडल अध्यक्ष लक्ष्मीदत्त पांडे ने बताया कि व्यापारियों का अतिक्रमण प्रशासन को दिखता है लेकिन रोड में फड व्यवसाई, रोड में खड़े वाहनों का अतिक्रमण नहीं दिखता। इनको भी हटाना चाहिए। व्यवसाई दीवान सिंह नेगी ने बताया कि व्यापारियों के हित को ध्यान में रखकर प्रशाशन द्वारा कार्यवाही की जाय। सभासद अंकित जोशी ने बताया कि अस्थाई अतिक्रमण को हटाने के लिये व्यापारी प्रशाशन के साथ है। और स्वयं अस्थाई अतिक्रमण को हटाने का कार्य किया जा रहा है।

गरुड़ में अतिक्रमण से आये दिन ट्रैफिक जाम की समस्या रहती हैं जिसमें स्कूली बच्चे, पैदल चल रहे राहगीर, बाहर से आ रहे पर्यटकों की गाड़िया, बारात की गाड़िया घंटों जाम में फंसे रहते है। अतिक्रमण हटने से ये समस्याएं कम हो जायेंगी।उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में भूमि अतिक्रमण की स्थिति

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में भूमि अतिक्रमण एक गंभीर समस्या है, खासकर सरकारी भूमि, नदियों के किनारे और पुराने बंगलों पर। हाल की रिपोर्टों के अनुसार, सटीक कुल क्षेत्रफल का आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, क्योंकि यह एक चल रही प्रक्रिया है। हालांकि, कुछ विशिष्ट मामलों से जुड़े आंकड़े सामने आए हैं:

जुलाई 2025 की रिपोर्ट: उत्तराखंड सरकार ने सख्त भूमि कानून के तहत 407 मामलों में कार्रवाई की, जिसमें बागेश्वर में 0.40 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कर राज्य सरकार के कब्जे में लिया गया। यह कुल 3.006 हेक्टेयर भूमि का हिस्सा था, जो पूरे राज्य में पुनः प्राप्त की गई। यह कार्रवाई अवैध भूमि लेन-देन और दुरुपयोग पर केंद्रित थी।b50194

जून 2025 की हाईकोर्ट सुनवाई: नैनीताल हाईकोर्ट ने बागेश्वर में सरकारी भूमि और पुराने बंगलों पर अतिक्रमण के खिलाफ जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट को राजस्व तथा लोक निर्माण और वन विभागों की कमेटी गठित कर 9 महीनों में अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया। प्रशासन ने स्वीकार किया कि सरकारी संपत्तियों पर व्यापक अतिक्रमण हुआ है, लेकिन कुल क्षेत्रफल का उल्लेख नहीं किया गया। ऐसा नहीं है कि अतिक्रमण सिर्फ शहरी इलाकों में है, ग्रामीण क्षेत्रों में भी कुछ रसूखदारों ने अतिक्रमण किया है। लेकिन कौन जांच करेगा और क्यों ?

जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे ने सार्वजनिक भूमि पर अवैध अतिक्रमण की पहचान के लिए बैठक बुलाई। सभी उप-जिलाधिकारियों और तहसीलदारों को एक महीने के अंदर अतिक्रमण चिन्हित करने और अस्थायी निर्माण तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए। स्थायी अतिक्रमण पर नोटिस जारी करने को कहा गया, लेकिन कुल प्रभावित क्षेत्र का आंकड़ा नहीं बताया गया।

जुलाई 2025 की अन्य रिपोर्ट के आधार पर, बागेश्वर में व्यापक अतिक्रमण से आपदा जोखिम बढ़ रहा है, खासकर सरयू और गोमती नदियों के किनारों पर (कपकोट से बागेश्वर तक)। स्थानीय निवासियों ने घरों और वर्षा जल नालियों पर निर्माण का आरोप लगाया है। जिला मजिस्ट्रेट ने स्वैच्छिक रूप से अतिक्रमण हटाने की अपील की, अन्यथा सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।

उपलब्ध स्रोतों में बागेश्वर के लिए कोई समग्र आंकड़ा (जैसे कुल हेक्टेयर में) नहीं मिला। यह संभवतः इसलिए क्योंकि सर्वेक्षण और हटाने की प्रक्रिया जारी है। जिले का कुल क्षेत्रफल लगभग 2,246 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें कृषि योग्य भूमि करीब 20,754 हेक्टेयर है, लेकिन अतिक्रमण का अनुपात अज्ञात रहा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *