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देहरादून में दरिदंगी

देहरादून, शिक्षा के हब के रूप में मशहूर होता एक शहर। हिमालयी राज्य उत्तराखण्ड की राजधानी। तमाम बड़े रसूकदारों का इलाका, जनप्रतिनिधियों का रैन बसेरा। देहरादून देव भूमि उत्तराखण्ड का सबसे महत्वपूर्ण गढ़ माना जाता है। भारतीय सेना का प्रतिष्ठित प्रशिक्षण केन्द्र भी यंहा है। कुल मिलाकर देहरादून महानगरीय सभ्यता में तब्दील होने को आतुर है। इतना होने के बाद भी देहरादून में हालिया गैंग रेप की घटना अफसोस जनक है, शर्मनाक है। देहरादून में देश विदेश से बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त करने को आते हैं। यही हाल रहा तो सुरक्षा की दृष्टि को ध्यान में रखते हुए कौन भेजेगा अपनी बेटियों को बच्चों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने। प्रदेश की कानून और महिला सुरक्षा व्यवस्था पर एक गहरा सवाल भी है, हालाकी पुलिस ने तुरंत ही गैंग रेप के आरोपियों को गिरफतार कर लिया है। उस लड़की की उम्र मात्र 16 साल थी।
रात ढाई बजे वो बस में सफर कर रही थी। लड़की स्टूडेन्ट भी उसे अकेला देखकर दरिन्दों का शैतानी दिमाग जाग उठा। पहले बस ड्राइवर धर्मेन्द्र सिंह, कंडक्टर देवेंद्र ने दुष्कर्म किया। उत्तराखण्ड रोडवेज की बस में रेप की घटना को अंजाम दिया गया। उसके बाद दूसरी बस के ड्राइवर राजपाल राणा और रवि को इनके मित्रों से पता चला तो वे भी पहुंच गए और बालिका के साथ दुष्कर्म किया। दरिन्दगी यहीं पर नहीं रूकी दुष्कर्म की ये खबर आईएसबीटी डिपो के कैशियर राजेश सोनकर को पता चली तो वह भी पहुंच गया और दुष्कर्म में शामिल हुआ। रेप के आरोपियों की इतनी प्लानिंग थी ऐसे में पीड़िता किससे मदद मांगती और अपनी सुरक्षा भी कैसे करती ? सरकारी बस में किसी भरोसे से ही बैठी होगी उसे यकीन होगा कि उसके बाप दादा की उम्र के ये वहशी उसके साथ कुछ भी बुरा नहीं करेंगे ना होने देंगे। लेकिन उस मासूम बेटी को यह नहीं मालूम था कि उसकी उम्र से कहीं सयाने लोग उसके साथ दरंदगी का विभत्स खेल खेलेंगे। आरोपियों की उम्र 57, 38, 34 साल और 32 साल है। यानि इन दरिंदो के लिए पीड़िता उम्र में आधी से भी कम बेटी/पोती के समान थी। तब भी गैंप रेप के दरिंदों को शर्म नहीं आई। प्रत्येक नागरिक देश के सबसे कठोर कानून के तहत इन दरिंदों को सजा देने की अपील करते हैं।
Vipin Joshi

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